जरूरत से ज्यादा उत्पादन और बाजार में खपत न निकलने का खामियाजा आलू किसानों को भुगतना पड़ रहा है। जो आलू आम लोगों के भोजन के लिए पैदा किया गया था उसे अब इन दिनों जानवरों को खिलाया जा रहा है। क्योंकि दिल्ली से लेकर संभल मंडी तक कहीं भी आलू के लिए पर्याप्त खरीदार नहीं मिल रहे हैं।
मंडी में जिनता आलू जाता है, जरूरी नहीं है कि वह बिक जाए। ऐसे हालातों में हजारों किसान ऐसे हैं जिन्होंने आलू शीत गृहों में रखा हुआ अपना आलू उठाना मुनासिब नहीं समझा। इस आलू को निकाल कर कोल्ड स्टोरेज खाली करना मुश्किल हो गया है। जब आलू के खरीदार नहीं मिले तो अधिकतर कोल्ड स्टोरेज मालिकों ने आलू को जानवरों का भोजन बना दिया। कोल्ड स्टोरेज के मालिकान बताते हैं कि दुधारू पशुओं के लिए 100-150 रुपये प्रति क्विंटल में बड़े पैमाने पर आलू की खपत की जा रही है। वहीं कुछ स्थान ऐसे हैं जहां आलू को कोल्ड स्टोरेज से निकाल कर रख दिया गया है जैसा खरीदार, वैसी बिक्री। जहां खरीदार नहीं हैं पर सड़ने के अंदेशे वाले आलू को फ्री में दिया जा रहा है।
अब तक कोल्ड स्टोरेज मालिक और किसान 100 करोड़ रुपये से अधिक का घाटा उठा चुके हैं। कोल्ड स्टोरेज मालिकों ने बताया कि आमतौर पर कोल्ड स्टोेरेज 31 अक्टूबर से 15 नवंबर तक आलू की शत प्रतिशत निकासी कर लेते हैं। लेकिन इस बार न तो घरेलू बाजार में आलू खपत निकली और न ही विदेशों को निर्यात हुआ। इसके चलते मुनाफे की उम्मीद में आलू पैदा करने वाले लाखों किसानों में घाटे में डूब गए। अधिकतर किसानों को अगली फसल के लिए कर्ज लेना पड़ा है।