सरायतरीन। गांव पवांसा में श्रीमद् भागवत कथा के सातवें दिन कन्याओं ने हवन में आहुति देकर माता-पिता और गुरु की सेवा करने का संकल्प लिया। इस दौरान कथाव्यास ने भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा के चरित्र के बारे में बताया। कहा कि दोनों की मित्रता धन, कपड़े, शरीर और चरित्र से नहीं थी, बल्कि मन से थी, इसलिए सभी को मन से मित्रता करनी चाहिए।
श्रीमद् भागवत कथा में कथा व्यास ब्रह्मानंद महाराज ने बताया कि सुदामा गरीब ब्राह्मण थे। अपने बच्चों का पेट भर सके उतने भी सुदामा के पास पैसे नहीं थे। सुदामा की पत्नी ने कहा हम भले ही भूखे रहें लेकिन बच्चों का पेट तो भरना चाहिए। इतना बोलते-बोलते उसकी आंखों में आंसू आ गए। सुदामा को बहुत दुख हुआ। उन्होंने कहा क्या कर सकते हैं। किसी के पास मांगने थोड़े ही जा सकते हैं। पत्नी ने सुदामा से कहा आप कई बार कृष्ण की बात करते हो। आपकी उनके साथ बहुत मित्रता है। ऐसा कहते हो वे तो द्वारका के राजा हैं। वहां क्यों नहीं जाते जाइए न वहां कुछ भी मांगना नहीं पड़ेगा।
सुदामा को पत्नी की बात सही लगी। सुदामा ने द्वारका जाने का तय किया। पत्नी से कहा ठीक है, मैं कृष्ण के पास जाऊंगा लेकिन उनके लिए क्या लेकर जाऊं। सुदामा की पत्नी पड़ोस में से पोहे ले आई। उसकी पोटली लेकर सुदामा श्रीकृष्ण से मिले। घर लौटते समय सुदामा घर पहुंचे। वहां उन्हें अपनी झोपड़ी नजर ही नहीं आई, क्योंकि भगवान श्री कृष्ण की कृपा से सारे दुख दूर हो गए। यह प्रसंग उनकी विभिन्न लीलाओं और शक्तियों को दर्शाता है। इस दौरान रिंकू शर्मा, मोहित राघव, सुमित राघव, बंटी गुप्ता उर्फ सौरभ, नीरज शर्मा, डॉ.मनोज कुमार शर्मा, टिंकू राघव, रजत विक्रांत सिंह आदि रहे।