घर बैठे ही बन गया था पंचम का आधारकार्ड
एसपी ने बताया कि वैसे आधारकार्ड बनवाने व संशोधन कराने के लिए व्यक्ति का मौके पर होना जरूरी होता है। वहीं, विनोद के मुताबिक पंचम सिंह के आधारकार्ड में संशोधन के लिए कहीं जाना नहीं पड़ा। गिरोह के सदस्यों की ओर से मशीन लाकर घर बैठे ही फर्जी तरीके से पूरी प्रक्रिया करते हुए डाटा वेश में संशोधन कर पंचम सिंह को संशोधित आधारकार्ड उपलब्ध करा दिया गया था। जानकारी में आया कि संशोधन आदि करने में वेंडरों को अधिक धनराशि भी नहीं देनी पड़ती है।
पंचम सिंह के आधार कार्ड संशोधन से पकड़ा गिरोह
एसपी ने बताया कि 2 मार्च को बहजोई थाना क्षेत्र के गांव बहरौली निवासी चंद्रसैन ने थाने में शिकायत की थी कि विनोद कुमार ने उसके बेटे के नाम से फर्जी तरीके से ट्रैक्टर निकाला था। जब उसके बेटे की मौत हो गई तो फर्जी तरीके से बेच दिया। साथ ही यह भी बताया था कि आरोपी ने अपने पिता की आधार कार्ड में उम्र कम कराकर पीएमजेजेवाई पॉलिसी कराकर लाभ भी लिया है। पुलिस ने विनोद को हिरासत में लेकर पूछताछ की तो उसके पिता के दो आधार कार्ड मिले।
जिसमें एक आधार कार्ड में जन्म तिथि 1 जनवरी 1955 और दूसरे आधार कार्ड में 1 जुलाई 1976 दर्ज थी। छानबीन में पता करने पर सामने आया कि आरोपी ने अपने पिता की 21 वर्ष आयु कम कराई थी। जिससे वह पॉलिसी का लाभ ले सके। आरोपी ने बताया कि 50 वर्ष से आयु होने पर ही पीएमजेजेवाई का लाभ लिया जा सकता है। आरोपी से पूछताछ के बाद यह भी जानकारी सामने आई कि एक गिरोह आधार कार्ड में संशोधन कर रहा है।
पंचम सिंह के आधार कार्ड में पिता का नाम अब्दुल शफीक और मां नसरीन दर्ज किया गया
विनोद कुमार ने जो आधार कार्ड संशोधन कराया था। उसमें फर्जी जन्म प्रमाणपत्र लगाया था। जिसमें विनोद ने अपने पिता का पता राजस्थान दर्ज कराया था। जबकि पंचम सिंह के पिता का नाम अब्दुल शफीक और मां का नाम नसरीन दर्ज कराया गया था। यह संशोधन 28 जून 2024 को किया गया। इसी जन्म प्रमाणपत्र के माध्यम से आधार कार्ड में संशोधन किया गया।
फर्जी बीमा करने वाले गिरोह से ही जुड़े मिले इस गिरोह के तार
विनोद के पिता पंचम सिंह का आधार कार्ड संशोधित कराकर पीएमजेजेवाई पॉलिसी कराई गई थी। जब पंचम सिंह की मौत हो गई तो पॉलिसी का लाभ भी लिया गया। रजपुरा थाना पुलिस ने जब फर्जी बीमा गिरोह को पकड़ा तो इसमें भी इस तरह के फर्जीवाड़े सामने आए थे। विनोद कुमार ने भी उसी तरह लाभ पाया है। यह गिरोह भी फर्जी तरीके से आधार कार्ड में संशोधन कर रहा था।
फर्जी तरीके से आधार कार्ड संशोधन करने वाले गिरोह के चार सदस्य गिरफ्तार किए गए हैं। इस गिरोह की जांच पड़ताल अभी जारी है। एएसपी अनुकृति शर्मा ने अपनी टीम के साथ छानबीन के बाद यह खुलासा किया है। पंचम सिंह के दो आधार कार्ड सामने आने के बाद यह कार्रवाई आगे बढ़ी। -कृष्ण कुमार विश्नोई, एसपी
ऐसे काम करता है गिरोह
एसपी ने बताया कि गिरोह तीन तरीके से काम करता है। इसमें पहला है वेब डिजाइनर, दूसरा है वेंडर और तीसरा है रिटेलर। एसपी ने बताया कि इन तीनों ही तरीके से अलग-अलग जिम्मेदारी से गिरोह काम करता था।
वेब डिजाइनर - आधार कार्ड में बदलाव के लिए पोर्टल की डिजाइनिंग, फर्जी प्रपत्र तैयार कर कोडिंग इत्यादि की जाती थी। यह लोग आवश्यकतानुसार इस तरह के कोड वैंडर को बेचते थे।
वेंडर - वेब डिजाइनर द्वारा जो पोर्टल उपलब्ध कराए गए हैं। वह रिटेलर को बेचकर डेटा फीडिंग करवाना और डेटा प्राप्त कर आधार ऑपरेटर की आईडी को इस्तेमाल कर आधार में धोखाधड़ी से संशोधन करना है।
रिटेलर - वेंडर से खरीदे गए पोर्टल में जरूरतमंद आवेदकों से विवरण प्राप्त करना और उनका विवरण मय फिंगर प्रिंट फर्जी संशोधन के लिए वापस भेजना। संशोधित आधार कार्ड की पर्ची ग्राहक को भेजना।
यूआईडीएआई की ओर से किए बदलाव से फर्जी काम पर लगी रोक
एसपी ने बताया कि माह फरवरी में यूआईडीएआई की ओर से किए गए बदलाव के बाद गिरोह के सदस्यों की मुश्किल बढ़ी और आधारकार्ड में फर्जी संशोधन करने आदि काम पर काफी हद तक रोक लगी। आरोपियों बताया कि आधार को लेकर अपनी स्कैनिंग मशीन में बदलाव किया गया था और साफ्टवेयर में भी अपग्रेडेशन किया था। फर्जी तरीके से आधारकार्ड में संशोधन करने से जुड़े सभी बिंदुओं पर जिला स्तर से यूआईडीएआई को सूचना दी जाएगी। एसपी ने बताया कि यूआईडीएआई को सूचना देने के बाद भी फर्जी तरीके से आधारकार्ड संशोधन आदि कार्य करने में काफी हद तक रोक लग सकेगी।