For the first time in 61 years, the main Ganesh idol made by artisans will be worshipped
- फोटो : CHANDAUSI
गणेश चतुर्थी मेले व रथयात्रा में पहली बार पूजन के लिए भगवान गजानन की मुख्य प्रतिमा कारीगरों द्वारा बनवाई गई है। पिछले 61 सालों में मेला व रथयात्रा के संस्थापक डॉ. गिरिराज किशोर गुप्ता स्वयं अपने हाथों से पूजन के लिए मुख्य प्रतिमा को बनाते चले आ रहे थे। बीमारी के चलते दिसंबर 2021 में उनका निधन हो गया था। पहली बार संस्थापक की देखरेख के बिना गणेेश मेले का आयोजन हो रहा है।
चंदौसी में गणेश चतुर्थी पर मेले व रथयात्रा की शुरूआत डॉ. गिरिराज किशोर गुप्ता ने वर्ष 1961 में की थी। धीरे-धीरे यह मेला बढ़ता गया और उत्तर भारत का प्रसिद्ध गणेश चतुर्थी मेला बन गया। डॉ. गिरिराज किशोर एक अच्छे चिकित्सक के साथ ही बड़े मूर्तिकार, चित्रकार भी थे। डॉ. गिरिराज किशोर पूजन के लिए वह स्वयं मुख्य गणेश प्रतिमा बनाते थे। गणेश चतुर्थी के दिन निकलने वाली विशाल रथयात्रा में सबसे पीछे यही प्रतिमा रहती और इसकी आरती के बाद रथयात्रा का शुभारंभ माना जाता। यही प्रतिमा मंदिर परिसर में पूजन के लिए स्थापित होती है तथा अनंत चतुर्दशी के दिन विधि-विधान से पूजन कर जुलूस के साथ राजघाट बबराला में विसर्जन किया जाता है। डॉ. गिरिराज किशोर लगातार इस प्रतिमा को बनाते थे। दिसंबर 2021 की रात को डॉ. गिरिराज किशोर गुप्ता का 90 वर्ष की आयु में बीमारी के चलते निधन हो गया था। मेला परिषद सदस्यों ने इस मुख्य प्रतिमा को बनाने की जिम्मेदारी कारीगरों को सौंपी थी। मेले में इस वर्ष पूजन के लिए पहली बार कारीगरों के द्वारा गणेश प्रतिमा बनाई गई है।
वर्ष 2021 व 22 में नहीं हुआ मेले का आयोजन
चंदौसी में वर्ष 1961 से लगातार मेले का आयोजन होता चला आ रहा है। वर्ष 2020 व 2021 में कोरोना पाबंदी के चलते मेले का आयोजन नहीं हो सका था। मेला परिषद के प्रतिनिधि मंडल की ओर से बाइक पर प्रतिकात्मक रूप से गणेश की प्रतिमा का शहर में भ्रमण कराया गया तथा अनंत चतुर्दशी के दिन विसर्जन कर किया गया था।