सीएम को गांव बुलाने की मांग को लेकर शहीद सुधीश कुमार की मां, पत्नी, पिता, भाई समेत 12 परिजन शुक्रवार को आमरण अनशन पर बैठ गए। जानकारी पर मौके पर पहुंचे एसडीएम और सीओ ने मनाने की कोशिश की, मगर बात नहीं बनी।
इधर, शहीद की पत्नी बोलीं- मेरे पति देश के लिए शहीद हो गए, सीएम इतना भी सम्मान न दे सके तो मैं आत्मदाह कर लूंगी। शहीद की मां ने भी आत्मदाह की धमकी दी है। वहीं, ग्रामीणों ने बीजेपी पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया। कहा कि, शहादत के बाद नेताओं ने गांव के विकास समेत तमाम वादे किए थे, मगर फिर ध्यान नहीं दिया।
गांव पनसुखा मिलक निवासी ब्रह्मपाल सिंह के बेटे सुधीश कुमार भारतीय सेना में सैनिक थे। भारत-पाक सीमा पर राजौरी में 16 अक्तूबर वर्ष 2016 को शाम को करीब 4.00 बजे शहीद हो गए थे। शहीद का शव गांव पहुंचा तो परिजनों ने तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को बुलाने की मांग को लेकर अंतिम संस्कार करने से इंकार कर दिया था।
इस पर भाजपाइयों ने मुद्दा बना लिया था पर सपा परिवार में रार के चलते अखिलेश यादव नहीं आए। बाद में भाजपाइयों ने शहीद के परिवार को आर्थिक मदद दिलाने और गांव के विकास के लिए वादों की झड़ी लगा दी थी।
सपा समेत दूसरे दलों के नेताओं ने भी तमाम वादे किए थे, मगर फिर वादे पूरे करने की ओर ध्यान नहीं दिया। इसी बीच 21 मई को सीएम योगी के मुरादाबाद आने का कार्यक्रम बना तो गुरुवार को तीन गांवों के लोगों ने पंचायत बुला ली।
सहमति बनी की सीएम को बुलाकर उनके दल समेत सभी दलों के नेताओं के वादे और हकीकत का आईना दिखाया जाय। इस पर पंचायत में आमरण अनशन करने का निर्णय लिया गया।
इसको लेकर शुक्रवार को सुबह 8.00 बजे शहीद की पत्नी कविता, मां हरवती, पिता ब्रह्मपाल, भाई अनिल, चाचा सुधीर, भाई मनोज, चाचा डॉ. मुनिदेव, चाचा चंद्रपाल, चाचा हेमराज, चाचा प्रमोद, दादा जागन सिंह, भाई ब्रजेश शहीद की समाधि पर आमरण अनशन पर बैठ गए। सूचना पर एसडीएम राशिद अली खां और सीओ बीपी सिंह बालियान भी पहुंच गए।