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बिजली व्यवस्था फेल, मरीज रहे गर्मी झेल

Sat, 25 Jun 2016 01:08 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला संभल
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बिजली - फोटो : amar ujala
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जिले की बिजली आपूर्ति व्यवस्था लड़खड़ा गई है। अघोषित कटौती और फाल्ट ने लोगों का चैन छीन लिया है, लोगों को 15 घंटे भी बिजली सप्लाई नहीं मिल पा रही है। सबसे बुरी स्थिति जिला अस्पताल की है। यहां की बिजली व्यवस्था पूरी तरह से फेल हो गई है। मरीजों के लिए लगाया गया जेनरेटर भी ज्यादातर बंद रहता है। नतीजतन भीषण गर्मी में यहां इलाज के लिए आने वाले मरीज अपने कष्टों को भूलकर पंखा झलने को मजबूर हैं। 
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अस्पताल को कटौती से निजात दिलाने के लिए अलग फीडर से आपूर्ति की योजना परवान नहीं चढ़ सकी है, नतीजतन शहर में हो रही कटौती से अस्पताल की भी व्यवस्थाएं बिगड़ जाती हैं, मगर इससे अस्पताल को बचाने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था ठीक नहीं है।

नतीजतन इससे मरीजों को परेशान होना पड़ता है। हाल यह है कि, इमरजेंसी में मोबाइल और पेट्रोमैक्स की रोशनी में ही मरीजों का इलाज किया जाता है। ऑपरेशन थिएटर में आपूर्ति के लिए इंवर्टर से काम चलाया जा रहा है, मगर जनरल वार्ड में भर्ती मरीज और उनके तीमारदार गर्मी में पंखा झलने के लिए मजबूर हैं।
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इमरजेंसी व लेबर रूम में इंवर्टर की सुविधा है। इसके अलावा एक पांच किलोवाट का जेनरेटर का कनेक्शन भी है। जरूरत पड़ने पर जेनरेटर चला दिया जाता है। उन्होंने बताया कि बिजलीघर से जिला अस्पताल के लिए विद्युत लाइन का प्रस्ताव शासन को गया हुआ है। जूनियर इंजीनियर ने सर्वे भी कर लिया है।- डॉ. कप्तान सिंह, चिकित्साधीक्षक, जिला अस्पताल
 
विद्युत आपूर्ति का शेड्यूल
सुबह 9 से 11 बजे तक व शाम को 4 से 6 बजे तक रोजाना बिजली कटौती होती है। इसके अलावा दिन में दो तीन बार फाल्ट व तार टूटने पर भी शट-डाउन ले लिया जाता है। कुल मिलाकर 24 घंटे में 15 से 16 घंटे विद्युत आपूर्ति हो पाती है।

गुरुवार की रात आठ बजे से डिलीवरी के लिए हमारा मरीज भर्ती किया गया है। बिजली की व्यवस्था दुरुस्त नहीं है। विद्युत आपूर्ति बंद होने पर रात में कई बार मरीज को हवा करनी पड़ी थी। - परवीन, जालब सराय।
 बिजली व्यवस्था ठीक नहीं होने के कारण मुझे और मेरे बच्चे को परेशानी हो रही है। तीमारदार दोनों को हाथ के पंखों से हवा कर रहे हैं। बिजली आपूर्ति होने पर अस्पताल के पंखे चलते हैं तो राहत मिलती है लेकिन बिजली आपूर्ति बंद होने पर फिर से परेशानी का सामना करना पड़ता है।- आशकारा, मिलक मिठौली



खरीद लिया बड़ा जेनरेटर चलाने के लिए बजट ही नहीं
संभल। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के रुपयों की बंदरबांट अब मरीजों पर भारी पड़ रही है। कटौती के वक्त अस्पताल में बिजली सप्लाई के लिए खरीदे गए जेनरेटतहत यूपी को मिले पैसे का किस तरह दुरुपयोग हुआ है। उसकी मिसालें आज भी दिखाई पड़ जाती हैं।

संभल के जिला अस्पताल में 150 केवीए का एक ऐसा बड़ा जेनरेटर लगा दिया गया है जिसे चलाना जिला अस्पताल के बूते के बात नहीं है। इसमें एक घंटे में 36-37 लीटर डीजल लगता है। इतने डीजल के बजट का कोई प्रावधान नहीं है। 

यही वजह है कि जब से जेनरेटर लगा है तब से ही बंद है। जानकारों का कहना है कि इस अस्पताल के लिए 30-30 केवीए के दो जेनरेटरों की जरूरत थी ताकि जितने हिस्से को पावर चाहिए उतने हिस्से को पावर मिल जाए और मरीजों का पसीना बहाना न पड़े। 

इस उपयोगिता और जरूरत की अनदेखी करके फंड को ठिकाने लगाया गया है। करोड़ों रुपये का गैर जरूरी सामान एनआरएचएम में खरीदे जाने की शिकायतें पहले भी रही हैं। करोड़ों खर्च किए जाने के बाद भी मरीजों को पसीना बहाना पड़ा रहा है।

विद्युत आपूर्ति बंद होने के बाद मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। भीषण गर्मी में डिलीवरी के लिए आईं महिलाओं को उनके तीमारदार हाथ के पंखे से हवा करते हैं। इसके अलावा यूपी के अन्य जिलों में भी ऐसे जेनरेटर देख जा सकते हैं। एक जेनरेटर की कीमत करीब 12 लाख रुपये की होगी।

जेनरेटर के डीजल के लिए उतना बजट नहीं मिल पाता है, जितना चाहिए। यही कारण है कि जेनरेटर चल नहीं पाता है। कई बार विभाग को इसके बारे में लिखित में जानकारी भी दे दी गई है। -उमराव सिंह, मुख्य चिकित्साधिकारी, संभल।
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