थाना असमोली के गांव भैंसोड़ा में एक किसान शनिवार को सुबह साढ़े आठ बजे तीस फीट गहरी बोरवेल में गिर गया। गांव वालों और परिजनों ने उसे निकालने का प्रयास किया पर कामयाबी नहीं मिली। साढे़ दस बजे प्रशासन ने बचाव कार्य शुरू कराया तो शाम करीब 6 बजकर 10 मिनट पर किसान जिंदगी की जंग जीतकर मौत के मुंह से वापस आ गया।
रेस्क्यू के दौरान ऐसे पल भी आए जब लगा जैसे किसान की जान चली जाएगी लेकिन प्रशासन के प्रयास और परिजनों की प्रार्थना से कामयाबी मिली। किसान के जिंदा बाहर निकलने से पुलिस, प्रशासन समेत ग्रामीणों ने राहत की सांस ली। किसान को उपचार के लिए टीएमयू अस्पताल भेजा गया है।
गांव भैंसोड़ा निवासी 32 वर्षीय किसान मनोज कुमार पिता राजाराम और दो मजदूर रोहताश व पप्पू को साथ लेकर खेत पर पहुंचा। खेत में बनी बोरवेल से ईंट निकालने की बात की। इस पर रोहताश व पप्पू ने कुंइया से ईंटें निकालने से मना कर दिया।
इस पर मनोज खुद ही बोरवेल में ईंट निकालने के लिए उतर गया जबकि पिता व दोनों मजदूर ऊपर ही खड़े रहे। आठ-दस ईंट निकालते ही मनोज के ऊपर मिट्टी की ढांग गिर गई। मनोज बुरी तरह से दब गया। ऊपर खड़े पिता व मजदूरों ने शोर मचाया। शोर सुनकर आस-पास खेतों में काम कर रहे लोग वहां आ गए।
उन्हाेंने मिट्टी हटाने का प्रयास किया। गांव वालों ने पुलिस को सूचना दे दी। करीब साढ़े दस बजे एसडीएम के आदेश पर असमोली की पुलिस मौके पर पहुंच गई। बोरवेल गहरी था। इसलिए बचाव कार्य शुरू नहीं हो सका। आनन-फानन में जेसीबी बुलाई गईं। इस बीच दमकल की दो गाड़ियां मौके पर पहुंच गईं।
जेसीबी मशीन की मदद से बोरवेल के नजदीक खुदाई शुरू कर दी गई। दोपहर करीब 12 बजकर 40 मिनट पर एसडीएम अमित कुमार व नायाब तहसीलदार नितिन कुमार तनेजा भी पहुंच गए। इस दौरान 1 बजे के करीब बारिश भी शुरू हो गई। इस दौरान राहत एवं बचाव कार्य बाधित हुआ। आधा घंटे तक लोगों की सांसें अटक गईं।
परिजन प्रार्थना करने लगे। बोरवेल से मनोज की आवाज आई तो लोगों को उसके जिंदा होने की आस हुई। बारिश रुकने के बाद बचाव कार्य शुरू किया गया। खुदाई चल ही रही थी कि साढ़े तीन बजे उस वक्त राहत एवं बचाव कार्य को झटका लगा जब दोबारा कुंइया में मिट्टी धसक गई। इससे बचाव कार्य कर रहे प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए।
मनोज को दोबारा आवाज दी गई। पलटकर जब कुंइया के भीतर से आवाज आई तो लोगों को यकीन हो गया मनोज जिंदा है। बोरवेल गहरी थी इसलिए मनोज दिख नहीं रहा था पर मनोज की आवाज ने बचाव कार्य में लगे लोगों का हौसला बढ़ा दिया। अब बोरवेल के चारों ओर मिट्टी की खुदाई की गई।
करीब सवा पांच बजे एक बार फिर से बोरवेल में मिट्टी गिर गई। इससे जिंदगी की आस को झटका लगा लेकिन प्रशासन और रेस्क्यू कर रहे लोगों ने हार नहीं मानी। खुदाई चलती रही। करीब 6 बजे ग्रामीणों को मनोज का सिर दिखाई दिया। शाम 6 बजकर 10 मिनट पर मनोज को जिंदा बोरवेल से बाहर निकाल लिया गया। किसान को उपचार के लिए मुरादाबाद भेजा गया है।