मुरादाबाद। संभल की राजनीति के केंद्र बिंदु रहे डॉ. शफीकुर्रहमान बर्क के सियासी कदम वर्ष 1996 में पहली बार लखनऊ से दिल्ली की ओर बढ़े थे। 1996 में सपा के टिकट पर मुरादाबाद लोकसभा सीट से चुनाव जीतकर डॉ. बर्क पहली बार संसद पहुंचे थे। वह मुरादाबाद से चार बार लोकसभा का चुनाव लड़े। तीन बार वह विजयी रहे।
93 वर्षीय डॉ. शफीकुर्रहमान बर्क मुरादाबाद मंडल की सियासत में सक्रिय रहे। उन्होंने विधानसभा और लोकसभा दोनों का प्रतिनिधित्व किया। वर्ष 1996 से पहले तक डॉ. बर्क की सियासत का केंद्र संभल ही रहा। वह संभल विधानसभा सीट से लगातार चुनाव लड़ते रहे। 1996 में हुए लोकसभा चुनाव से डॉ. बर्क की एंट्री मुरादाबाद की राजनीति में हुई थी। मुरादाबाद सीट से सपा के टिकट पर वह लोकसभा का चुनाव लड़े। भाजपा उम्मीदवार संदीप अग्रवाल को हराकर वह पहली बार संसद बने। डॉ. बर्क मुरादाबाद से लगातार चार बार सपा के लोकसभा प्रत्याशी रहे। तीन पर उन्हें जीत मिली थी। डॉ. बर्क 1996, 1999 और 2004 में मुरादाबाद सीट से विजयी हुए थे। 1999 लोकसभा चुनाव में वह अखिल भारतीय लोकतांत्रिक कांग्रेस के प्रत्याशी चंद्र विजय सिंह से चुनाव हार गए थे। 2009 के लोकसभा चुनाव में सपा ने उन्हें मुरादाबाद से उम्मीदवार नहीं बनाया। इसके बाद नाराज डॉ. बर्क बसपा में शामिल हो गए थे। बसपा के टिकट पर संभल से लोकसभा चुनाव लड़े और विजयी हुए।