अगर इस बीमारी का वायरस सामने आता है तो टीकाकरण पर सवाल खड़े होना स्वाभाविक हैं। इससे स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मचा हुआ है। जिन दो गांवों में डिप्थीरिया आशंकित केस आए हैं उन गांवों में बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण कराया गया है लेकिन कोई नया केस सामने नहीं आया है। बच्चे भी अब स्वस्थ हैं।
डिप्थीरिया आशंकित होने संबंधी पहला केस 11 अगस्त को सामने आया। दिल्ली के महर्षि वाल्मीकि हास्पिटल में एंचोली निवासी मिंजार की बेटी मुस्कान (4 वर्ष) का उपचार चल रहा था। चिकित्सकों ने इसके डिप्थीरिया आशंकित होने की जानकारी दी। वहीं दूसरा केस इसी अस्पताल की ओर से 18 अगस्त को रिपोर्ट किया गया। यह केस हसनपुर मुंजब्ता का है।
इसका उपचार भी दिल्ली के महर्षि वाल्मीकि अस्पताल में चल रहा था। उपचार के दौरान हसनपुर मुंजब्ता के लाखन सिंह की बेटी ऋतिका (7 वर्ष) में डिप्थीरिया होने का अंदेशा सामने आया था। इन दोनों मामलों में शनिवार को डब्ल्यूएचओ के सर्विलांस मेडिकल अफसर विपिन कुमार मिश्रा ने जिलाधिकारी को जानकारी दी। जिलाधिकारी ने तत्काल सीएमओ से कहा कि टीकाकरण में कहीं न कहीं कोई चूक है। चेक कराएं। दोषियों पर कार्रवाई करें।
मखदूमपुर गांव में बुखार से एक और मौत, 100 से अधिक बीमार
संभल। बुखार से नहीं थम रहा मौतों का सिलसिला थमता नहीं दिख रहा है। सिरसी के करीबी गांव मखदूमपुर में चौबीस घंटे के भीतर बुखार से एक मौत हुई है, जबकि 21 दिन में तीन मौतें हुईं हैं। जिले में अब तक 19 मौतें हो चुकी हैं।
सिरसी के करीबी गांव मखदूमपुर गांव में एक महीने से बीमारी का सीजन चल रहा है। यहां सबसे पहले कल्लू (62 वर्ष) पुत्र मोहम्मद सफी की मौत हुई। इसके बाद इमाम बख्श (55 वर्ष) पुत्र खैराती और अब असगर (65 वर्ष) पुत्र अलीबख्श की मौत हुई है।
असगर पांच दिन तक बुखार के चलते जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे थे। इस गांव के निवासी चाऊ, सईद अहमद, भूरी समेत 100 से अधिक लोग बीमार हैं। निजी अस्पतालों में उपचार करा रहे हैं। पौटा, मोहम्मदपुर मालिनी, मिलक मिठौली, धीमरखेड़ी में बुखार का प्रकोप चल रहा है। अधिकतर घरों में लोग बीमार हैं। सिरसी के मोहल्ला शर्की में कई लोग बीमार है। मोहल्लेे के निवासियों और सभासद ने चिकित्सा शिविर लगाने की मांग की है। वहीं उत्तर प्रदेश कांग्रेस सेवादल की अतिरिक्त महिला मुख्य संगठक राजेश्वरी त्यागी ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से गांवों में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने की मांग की है।
सौंधन के सरकारी अस्पताल में बिना डाक्टर के हो रहा मरीजों का उपचार
सौंधन/संभल(ब्यूरो)। जिला अस्पताल में चिकित्सकों की कमी से मरीजों को परेशानी है पर ग्रामीण क्षेत्र में इससे भी खराब हालात हैं। सौंधन के सरकारी अस्पताल में बिना डाक्टर के मरीजों का उपचार हो रहा है। इसे इलाज के नाम पर खिलवाड़ नहीं तो और क्या कहेंगे?
सौेंधन में 2007 में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की स्थापना की गई थी। अस्पताल में एक दिन में 100-150 मरीज आ रहे हैं। फिर भी अस्पताल में डाक्टर नहीं है। जबकि इस समय बुखार का सीजन जल रहा है। अमर उजाला की टीम जब शनिवार को दोपहर एक बजे पहुंची तो अस्पताल में फार्मासिस्ट उपचार कर रहे थे। सीएमओ डा. उमराव सिंह का कहना है कि जिले में जरूरत के हिसाब से चिकित्सक हैं। इसलिए कुछ स्थानों पर फार्मासिस्ट से काम चलाया जा रहा है।