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Sambhal News: चंद्रघंटा स्वरूप की आराधना के लिए उमड़े भक्त

Wed, 02 Apr 2025 01:06 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, संभल
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संभल। चैत्र नवरात्र के तीसरे दिन चंद्रघंटा स्वरूप की आराधना की गई। श्रद्धालुओं ने मंदिरों में विधिविधान से दोनों माताओं की पूजा कर खुशहाली की कामना की। वहीं, घरों में दुर्गा सप्तशती का पाठ किया गया।नगर के मोहल्ला हल्लूसराय स्थित चामुंडा देवी मंदिर बड़ी संख्या में भक्त पूजा अर्चना करने के लिए पहुंचे थे। मां की आराधना करके सुख समृद्धि की कामना की। महंत मुरली ने बताया कि मां का यह स्वरूप पूर्ण ज्योतिर्मय एवं अत्यंत भव्य है। इनके दाहिने हाथ में जप की माला एवं बाएं हाथ में कमंडल रहता है। इनकी उपासना से तप, त्याग, वैराग्य, सदाचार, संयम की वृद्धि होती है। मनुष्य को सर्वत्र सिद्धि और विजय की प्राप्ति होती है। बाघ पर सवार मां दुर्गा की तीसरी शक्ति देवी चंद्रघंटा के मस्तक में घंटे के आकार का अर्धचंद्र विराजमान हैं, इसलिए इन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है। इनकी आराधना से साधकों को चिरायु, आरोग्य, सुखी व संपन्न होने का वरदान प्राप्त होता है। बताया कि नवरात्र के चौथे दिन मां कुष्मांडा का पूजन होगा। मंदिर में मां के इस स्वरूप की आराधना करने से हर भक्त की मनोकामना पूर्ण होती है।
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प्राणवायु को गति प्रदान कर जीवन की रक्षा करती हैं मां चंद्रघंटा
संभल। शिव गोरख मंदिर समिति द्वारा श्री कल्कि पधारो धरती पर शृंखला के तहत पंजू सराय में मां दुर्गा स्तवन की 90वीं कड़ी के तीसरे दिन मां दुर्गा को पान, फल, फूल, ध्वजा, नारियल, शहद, दूध, पंचमेवा, मिश्री, अष्टगंध, घृत आदि से पूजन किया गया। यज्ञ में आहुतियां देकर भारत राष्ट्र की प्रगति, श्री कल्कि के शीघ्र प्राकट्य की कामना की गई। यज्ञाचार्य डॉ. योगी नागेंद्र मोहन ने कहा कि मानव देह की नाभि में स्थित अग्नि स्वरूप धारण कर मां चंद्रघंटा प्राणवायु को गति प्रदान कर जीवन की रक्षा करती है। इस दौरान नरेश सैनी, ज्वालेश श्रीमाली, आनंद सैनी आदि रहे।

चतुर्थ माता कूष्मांडा के दर्शन कर की पूजा-अर्चना

बहजोई। चैत्र नवरात्र में चतुर्थ माता कूष्मांडा की पूजा-अर्चना कर श्रद्धालुओं ने मंदिरों में भजन-कीर्तन किया।मंगलवार को मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ रही। श्रद्धालुओं ने हवन-पूजन कर उपवास रखा। शाम को मंदिरों में महाआरती की गई। माता के जयकारे लगाए गए।
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