संभल। इस समय लोग लगातार बुखार की चपेट में आ रहे हैं। मरीजों में डेंगू और मलेरिया के लक्षण पाए जा रहे हैं, लेकिन जिला अस्पताल और निजी लैब की जांच में यह निगेटिव आ रहा है। तीमारदार परेशान हैं। हालांकि निजी अस्पतालों में पहुंचे ऐसे मरीजों का डेंगू व मलेरिया मानकर ही उपचार चल रहा है। प्लेटलेट्स कम होने पर प्लाज्मा चढ़ाया जा रहा है।जिला अस्पताल में इसके अलावा टायफाइड के मरीज भी मिल रहे हैं। चिकित्सकों का कहना है कि बदलते मौसम का असर है। इसके चलते लोग बीमार हो रहे हैं। हालांकि
शुक्रवार को जिला अस्पताल में एक हजार से ज्यादा मरीज की ओपीडी हुई। इसमें 100 से ज्यादा बुखार से पीड़ित मरीज पहुंचे। डेंगू आशंकित मानते हुए 25 मरीजों की जांच की गई। इसके अलावा मलेरिया आशंकित मानते हुए 22 मरीज की जांच कराई। हालांकि इसमें एक भी मरीज पॉजिटिव नहीं मिला। टाइफाइड और वायरल के मरीज लगातार मिल रहे हैं। बुखार से गंभीर 25 मरीज जिला अस्पताल में भर्ती हैं जिनका उपचार चल रहा है।
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निजी अस्पतालों में जांच और उपचार के नाम पर मरीजों का शोषण
निजी अस्पताल जाने वाले बुखार पीड़ित मरीजों की जांच डेंगू आशंकित मानते हुए कराई जा रही है। इस जांच के 800 रुपये जाते हैं। पॉजिटिव नहीं मिलने और प्लेट्लेट्स कम होने के बाद प्लाज्मा तक लगाया जा रहा है। कई अस्पतालों से तो खून चढ़ाने के लिए भी पर्ची लिखी जा रही है। शहर में संचालित निजी ब्लड बैंक से ब्लड और प्लाज्मा की मांग लगातार की जा रही है। अब सवाल उठता है कि जब डेंगू पॉजिटिव मरीज नहीं है तो प्लाज्मा क्यों लगाया जा रहा है।
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ब्लड बैंक से ब्लड और प्लेटलेट्स की मांग लगातार हो रही
डॉ. सचिन सक्सेना चैरिटेबिल ब्लड बैंक के मैनेजर आशिक अली ने बताया कि प्रतिदिन चार से पांच मरीजों के लिए प्लेटलेट्स की खरीद की जा रही हैं। एक जंबो पैक भी एक मरीज के लिए गया है। एक सप्ताह के अंदर कई मरीजों के लिए फ्रेश ब्लड भी गया है।
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जिला अस्पताल में डेंगू और मलेरिया आशंकित मरीजों की जांच की जा रही है लेकिन अभी तक कोई भी डेंगू पीड़ित मरीज नहीं मिला है। जो गंभीर बुखार से पीड़ित मरीज हैं, उनका उपचार भर्ती कर किया जा रहा है।
डॉ. राजेंद्र सैनी, सीएमएस, जिला अस्पताल, संभल