अंतर्राष्ट्रीय बाजार में मेंथा उत्पादों की मांग में गिरावट होने का असर भारतीय बाजार पर पड़ा है। मेंथा आयल के भाव टूट रहे हैं। बाजार में खरीदार कम हैं। तेजी की उम्मीद में अपना माल रोककर चल रहे तमाम किसान उलझन में आ गए हैं। व्यापारी फिलहाल देखो और इंतजार करो की नीति पर चल रहे हैं।
भारतीय मेंथा बाजार विदेशी बायर्स की खरीदारी और डिमांड के आधार पर चलता है। वहीं वायदा बाजार में होने वाले कारोबार से भी मेंथा आयल ओर मेंथा उत्पादों की कीमतों में उतार-चढ़ाव नजर आता है। इस समय वायदा बाजार में आगामी महीनों के लिए मेंथा के भाव में मंदी के तेवर है। वहीं अंतराष्ट्रीय स्तर पर यूरोप, अमोरिका और चीन से उम्मीद के मुताबिक आर्डर नहीं मिल रहे हैं।
भारतीय निर्यातकों ने बताया कि अंतराष्ट्रीय स्तर पर यह आंकलन किया जा रहा है कि निकट भविष्य में नई फसल आने पर मेंथा के बाजार भाव घट सकते हैं। इस आंकलन के कारण ही अंतर्राष्ट्रीय खरीदार इस समय उतना ही माल ले रहे हैं जितने माल की खपत उन्हें जून से पहले जरूरी है। निर्यातकों ने बताया कि आमतौर पर नई फसल आने के वक्त भाव घट जाते हैं। इस आधार पर विदेशी कंपनियां माल की खरीदारी में कंजूसी दिखा रही है।
इससे तेजी की उम्मीद रखने वाले किसान और कुछ स्टाकिस्ट निराश हो रहे हैं। वे लोग पछता रहे हैं जिन्होंने तेजी आने पर और तेजी की उम्मीद में अपना माल रोक लिया था। मेंथा आयल जीएलसी का भाव संभल में 1365 रुपये प्रति किलोग्राम है जबकि दिसंबर में यही भाव 1985 रुपये प्रति किलोग्राम तक संभल मंडी में रहा है। ऐसी स्थिति में उन लोगों को पछताना ही पड़ेगा जो तेजी के दौर में अपना माल बेचने से चूक गए थे।