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बहन की शादी के पांच लाख नहीं जुटे तो लगा ली फांसी

Sun, 24 Apr 2016 01:04 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/चंदौसी
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हत्या के बाद बिलखते परिजन।
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दहेज लोभियों की जिद के आगे एक किसान हार गया। बहन की शादी के लिए दहेज के पांच लाख रुपये नहीं जुटने पर किसान ने शनिवार को खेत पर जाकर पेड़ पर फंदा डालकर फांसी लगा ली। शनिवार को बहन की लगुन जाने से कुछ घंटे पहले ही उसके आत्मघाती कदम उठाने से गांव का हर शख्स सन्न रह गया।
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मामला गुन्नौर क्षेत्र के भोजराजपुर का है। घटना की जानकारी पुलिस तक नहीं पहुंची है। गुन्नौर थाना क्षेत्र के भोजराजपुर गांव निवासी ओमप्रकाश यादव (26) पुत्र औघड़ सिंह यादव ने अपनी बहन गुड्डो की शादी शानोशौकत के साथ रजपुरा थाना क्षेत्र के एक गांव के एक युवक से तय की थी।

बताते हैंकि उस समय वर पक्ष ने दहेज को स्पष्ट नहीं किया था। रिश्ता तय करते समय ही ओमप्रकाश ने एक बाइक व एक लाख रुपये का उपहार दे दिया था। लगुन 23 अप्रैल को चढ़ानी थी। आरोप है कि लगुन से कुछ दिन पहले ही वर पक्ष ने कहाकि शादी सात लाख में तय हुई तो करीब पांच लाख की शेष रकम लगुन के दौरान ही चाहिए।
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ओमप्रकाश रकम जुटाने में जुट गया। लेकिन रकम नहीं जुट सकी। शुक्रवार की शाम को वह टूट गया। यह देखकर उसकी पत्नी राजवती शुक्रवार की शाम को ही अपने मायके चली गई, अपने भाइयों से रुपये उधार लेने के लिए। देर रात मायके पहुंची। शनिवार की सुबह ही बात करती लेकिन ओमप्रकाश के पास लगुन चढ़ने के एक दिन पहले रकम आधी भी नहीं थी, उसे लगा कि वर पक्ष के लोग कहीं तमाम रिश्तेदारों के सामने उसे अपमानित न कर दे, इस भय से ही शायद वह मध्यरात्रि के करीब रस्सी लेकर खेत की ओर चला गया।   वहां पेड़ पर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। सुबह को लोगों को जानकारी हुई तो खलबली मच गई। मायके गई पत्नी को भी सूचना दी गई तो वह बेहोश हो गई। परिवार में करुणक्रंदन है। हर कोई दहेजलोभियों को कोस रहा है। परिजनों ने पुलिस को बिना बताए ही ओमप्रकाश के शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया है। पुलिस क्षेत्राधिकारी गुन्नौर प्रमोद कुमार ने बताया कि युवक की आत्महत्या की कोई जानकारी पुलिस को नहीं दी गई है। 


राजवती रो रोकर यही कर रही थी कि मुझे क्या पता कि मेरी ही दुनिया उजड़ जाएगी। भाइयों ने भी कह दिया था कि मदद करेंगे, फिर जो नाते रिश्तेदार थे, वह भी मदद करने को कह रहे थे लेकिन यह लोग यदि उनके सामने मदद को हाथ बढ़ा देते तो शायद मेरा पति जीवित होता। ननद का रिश्ता जहां तय हुआ था वह काफी लालची लोग हैं, अचानक उन्होंने पूरी रकम लगुन में लेने की मांग रख दी थी।

-गुड्डो गुमसुम है, आंसू सूख चुके हैं, समझ नहीं पा रही कि आखिर यह क्या हो गया। भाई ने उसकी जिंदगी बसाने की खातिर अपनी जिंदगी ही खत्म कर ली। कुछ क्षण परिजनों से बोती सिर्फ इतना कि यदि ऐसी ही स्थिति थी तो शादी न करते या फिर लालची परिवार से रिश्ता तोड़कर कहीं और शादी तय कर देते लेकिन भाई के ऐसे जानलेवा निर्णय से तो पूरा परिवार ही खत्म सा हो गया है।
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