मानव सेवा समिति चंदौसी की देखरेख में आयोजित मानव मंगल मिलन सद्भावना समागम में आठवें दिन साकार विश्व हरि ने हजारों भक्तों के बीच प्रवचन करते हुए कहाकि साकार विश्वहरि संपूर्ण ब्रह्म हैं। इनसे संसार में कुछ भी छिपा नहीं है। उनके शब्दों का काटना त्रिभुवन में किसी के वश में नहीं है।
साकार विश्व हरि ने कहाकि समाज में आज जो जाति पात का जहर घोल रहे हैं, वह सभी महाकाल की गिरफ्त में हैं। जिस दिन उनका अतीत का कर्म समाप्त हो जाएगा। उस दिन वह स्वयं की रसातल में चले जाएंगे। परमात्मा के दो स्वरूप होते है, निराकार ब्रह्म साकार रूप आकर ही जीवात्माओं का कल्याण करते हैं।
इसलिए साकार विश्व हरि आपको दरिद्र नहीं बल्कि मालामाल कर रहे हैं। हमारा आपका संबंध सिर्फ वचन का है। वचन मानकर चलते रहो, परिवार भी खुशहाल रहेगा। मानव हो, मानव से प्रेम करो और मानवता अपनाओ। भाई चारे को तले से लगाओ। आत्मा को मानव तन मिलता है, तभी उसे पद प्रतिष्ठा मिलती है।
व्यक्ति को पद प्रतिष्ठा भी उसके संचित कर्म के आधार पर ही मिलती है। सहयोगियों में रमेशचंद, यादराम, श्याम सिंह, अशोक कुमार, रविकांत, रामपत, हरीश, पप्पू सिंह, क्रांति देवी, राजरानी, विपिन, जसवंत, हुकुम सिंह, तिलकराज, बिजेंद्र सिंह, राजाराम, पूरन लाल, दाताराम, सुरेंद्र सिंह, राजेंद्र सिंह, कीरतपाल सिंह, शिव औतार गुप्ता आदि रहे।