साकार विश्व हरि ने कहा कि परमात्मा के दो रूप होते हैं, एक निर्गुण व दूसरा सगुण। जब- जब धरा का माहौल खराब हुआ तब तब वह निर्गुण निराकार ब्रह्म सगुण रूप में आकर अपना प्राकट्य मानव तन में करते हैं। वर्तमान में भी धरा का माहौल बेहद खराब हो चुका है।
चंदौसी में मौलागढ़ तिराहे पर विशाल पंडाल में प्रवचन करते हुए साकार विश्वहरि ने कहा कि परमात्मा ने हमेशा ही हर युग में आकर मानवता की रक्षा की है, वही मानवता के सच्चे रक्षक हैं। सभी को परमात्मा की भक्ति करनी चाहिये। मानव जाति के लोगों को हाथ के सच्चे होना चाहिए।
व्यवस्था में रमेशचंद, यादराम, श्याम सिंह, हुकुम सिंह, सुरेश गौतम, सुरेंद्र, ज्ञान सिंह, हरीश, क्रांति देवी, राजरानी, गायत्री देवी, सर्वेश देवी, तिलकराज, जसवंच, विपिन, रामलाल, मनोज, राजेंद्र सिंह, अशोक कुमार व वेदप्रकाश आदि रहे।