नई तकनीक का इस्तेमाल करना वक्त की जरूरत है। यदि नई तकनीकों का इस्तेमाल नहीं किया तो दुनियावी तरक्की में पीछे छूट जाएंगे। दीनी तालीम के साथ दुनियावी तालीम भी जरूरी है। यह बात फ्रीडम फाइटर मौलाना इस्लाम वेलफेयर सोसाइटी की ओर से आयोजित कांफ्रेंस में कही गई।
गुरुवार की रात को दीन-ए-इस्लाम और नई तकनीक विषय पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। मौलाना डा. नजीब कासमी संभली ने ऐसे दीनी एप्स की जानकारी जिन्हें प्ले स्टोर से आनलाइन डाउनलोड किया जा सकता है। दोनों एप्स डाउनलोड होने के बाद बिना इंटरनेट के काम कर सकेंगे।
जलसे के सदर और देवबंद स्थित दारुल उलूम के नायब मुहतमिम मौलाना अब्दुल खालिक संभली ने एप्स पेश करने के लिए डा. नजीब कासमी को मुबारकबाद पेश की। मदरसा शाही मुरादाबाद के हदीस मुफ्ती सलमान मंसूरपुरी ने कहा कि नई टेक्नालाजी का तकरीबन 80 फीसदी गलत और सिर्फ 20 फीसदी सही इस्तेमाल हो रहा है।
डा. नदीम तरीन ने कहा कि हम अपनी नई नस्ल रो स्मार्ट फोन के इस्तेमाल करने से नहीं रोक सकते हैं। हमारे उलमा और मदारिस इस्लामिया को इस्लाम की नशर व इशाअत के लिए नई टेक्नालाजी जरूर अख्तियार करना चाहिए।
फ्रीडम फाइटर मौलाना इस्माइल वेलफेयर सोसाइटी के सदर मौलाना सुहेल कासमी ने आयोजन को सफल बताया। मौलाना अब्दुल मुईद कासमी संभली, मुफ्ती जुनैद आलम कासमी, मौलाना तंजीम आलम कासमी, मौलाना इशा जाकिर कासमी, मौलाना नुरुल इस्लाम कासमी, मौलाना बिलाल अहमद कासमी ने भी अपने विचार रखे।
निजामत मौलाना मुजम्मिल हुसैन ने की। तिलावते कुरान और नात-ए-पाक इकरार अहमद ने पढ़ी। मौलाना आलम कासमी मुरादाबाद से आए।