रेलवे स्टेशन रोड पर सीएमओ दफ्तर से करीब 50 मीटर की दूरी पर गुरुद्वारा के सामने करीब डेढ़ माह पहले खुले एक निजी अस्पताल में सुबह साढ़े आठ बजे करीब गांव मुल्हैटा निवासी रमेश ने अपने करीब 80 वर्षीय पिता रामदयाल पुत्र बिहारी को भर्ती कराया था।
उनके निजी अंग में कोई परेशानी थी। अस्पताल के स्टाफ ने उपचार शुरू कर दिया। लेकिन, दोपहर में करीब ढाई बजे मरीज की हालत बिगड़ने पर डॉक्टर और स्टाफ से रमेश और अन्य परिजनों की मरीज को रेफर करने को लेकर कहासुनी हो गई। देखते-देखते परिजन हंगामा करने लगे। बता बढ़ती देख डाक्टर और स्टाफ के लोग अस्पताल छोड़ कर भाग गए खड़े हुए। अस्पताल में सिर्फ तीन-चार मरीज ही रह गए। सूचना पर पहुंची पुलिस ने मरीज के परिजनों से मामले की पूरी जानकारी ली। इसके बाद परिजन मरीज को उपचार के लिए उच्चीकृत अस्पताल में ले गए। मौके पर खासी भीड़ लग गई।
इस बीच दूसरे मरीज भी अस्पताल छोड़ कर चले गए। साढ़े तीन बजे करीब मुख्य चिकित्साधिकारी डा. उमराव सिंह भी मौके पर पहुंच गए। सीएमओ के पहुंचने से पहले ही अस्पताल का मेनगेट बंद हो गया। छोटे दरवाजे से सीएमओ अस्पताल में गए और पूरा जायजा लेने के बाद अस्पताल को सील करने के आदेश दिए। इस पर स्वास्थ्य विभाग की टीम ने अस्पताल को सील कर दिया।
एफआईआर दर्ज
बहजोई(ब्यूरो)। मुख्य चिकित्साधिकारी डा. उमराव सिंह के आदेश पर क्वेक्स टीम प्रभारी डा. पवन कुमार ने अस्पताल पर सील लगाने के बाद दवाओं व पर्चियों को कब्जे में ले लिया है। उन्होंने बताया कि तहरीर समेत दवाइयां व पर्चियां सील कर थाना पुलिस को दी गई हैं। थानाध्यक्ष प्रवीन सोलंकी ने बताया कि डा. पवन कुमार की तहरीर पर पुलिस ने रमेश निवासी गांव रंपुरा थाना बहजोई के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है।
अफसरों की लापरवाही मरीजों पर पड़ रही भारी
बहजोई(ब्यूरो)। जिले भर में झोलाछापों पर कार्रवाई के लिए मुख्य चिकित्साधिकारी ने टीम गठित कर रखी है। लेकिन, टीम की लापरवाही के चलते सीएमओ दफ्तर से मात्र 50 मीटर की दूरी पर करीब डेढ़ माह पहले एक निजी अस्पताल खोला गया। इस पर न अस्पताल पर नाम का बोर्ड लगा था और नही डाक्टरों व स्टाफ के नाम लिखे थे। इसकी संबंधित टीम को भनक तक नहीं लगी।
और भी चल रहे हैं ऐसे अस्पताल
बहजोई(ब्यूरो)। सीएमओ में ही झोलाझाप के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए गठित टीम के प्रभारी भी बैठते हैं। इसके बावजूद नगर में कई और फर्जी अस्पताल संचालित हैं। इनमें मरीजों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ किया जाता है। विभाग सिर्फ शिकायत का इंतजार करता रहता है।