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इल्म और तरक्की का इतिहास समेटे है संभल

Sun, 27 Dec 2015 12:12 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला संभल
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भले ही दीपा सराय के एक व्यक्ति का नाम आतंकी संगठन से जुड़ा हो, लेकिन इसके लिए क्षेत्र के इतिहास को नहीं भुलाया जा सकता, जो इल्म और तरक्की से जुड़ा है। आर्थिक स्थिति में छोटे हों या बड़े पर संभल के वाशिंदे अपने हुनर, इल्म और अखलाख के बदौलत, देश में ही नहीं विदेशों में भी अपने शहर को एक अच्छी पहचान दे रहे हैं।
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अपने शहर की पहचान को अलकायदा नेटवर्क से जोड़ने पर लोगों को ऐतराज है। लोगों का कहना है कि एक-दो लोगों के पकड़े जाने से किसी शहर को आतंकी नेटवर्क का हिस्सा कैसे बताया जा सकता है। यह सवाल उठा रहे तमाम लोगों ने शनिवार को हुई बातचीत में कहा कि इल्म, हुनर और सियासत में संभल का बड़ा नाम है।


सियासी अतीत में जाएं तो इसहाक संभली, नवाब महमूद, मुकीमुर्रहमान खां जैसे दिग्गज नेताओं से जुड़ता है। मौजूदा परिवेश में आएं तो पूर्व सांसद डा. शफीकुर्रहमान बर्क, कैबिनेट मंत्री नवाब इकबाल महमूद और पूर्व मंत्री अकीलुर्रहमान खां, उर्दू अकादमी की अध्यक्ष तरन्नुम अकील और इसी अकादमी के अध्यक्ष रहे आजम कुरैशी का नाम आता है।
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पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव और प्रोफेसर रामगोपाल यादव भी यहां से सांसद रहे हैं। नौकरशाही में संभल के प्रतिनिधित्व की बात आए तो कौन भूल सकता है कि दीपासराय के निवासी नासिर कमाल इन दिनों एडीजी हैं। अतीत में जावेद उस्मानी उत्तर प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव रह चुके हैं।


अतीत में संभल के सिरसी निवासी सय्यद नवाब हसन, हैदराबाद में निजाम के यहां जज रहे हैं। मौजूदा समय में इल्म की बात करें तो मौलाना मुफ्ती अब्दुल खालिक संभली का नाम सबसे पहले आएगा। वह देवबंद में स्थित दारुल उलूम के प्रो-वाइस चांसलर हैं। बरेली यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रोफेसर मुशाहिद हुसैन भी यहीं के हैं।


हिकमत में हकीम रईस ने संभल को कई मुल्कों में पहचान दी। उनके नुस्खे तमाम बीमारों को नई जिंदगी देते रहे हैं। हकीम रईस के नाम पर यूनानी मेडिकल कालेज बनाया गया है। सऊदी अरब में कारोबार से अपनी पहचान बना चुके नदीम अख्तर तरीन अब अपनी सामाजिक सेवाओं से देश-प्रदेश के कई हिस्सों में संभल को नई पहचान दे रहे हैं।


उन्होंने अलीगढ़ में तरीन मेडिकल कालेज और तरीन यूनिवर्सिटी की स्थापना की है। रियाद, जद्दा समेत कई शहरों में उनके बनाए कालेज संचालित हैं। हुनर की बात करें तो हाफिज हबीबुर्रहमान सैफी ने हड्डी-सींग से आभूषण बनाकर संसार में संभल को पहचान दी। अब तो विदेशों में हड्डी-सींग से बने सुंदर-सुंदर आभूषण बहुत पसंद किए जाते हैं। इसके अलावा मैंथा का बड़ा कारोबार भी संभल की पहचान है।
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