चंदौसी। सपा नेता चंद्रपाल माली की हत्या का मुख्य आरोपी अभी भी पुलिस की पकड़ से दूर है। पिछले चौबीस घंटे से हर दो - तीन घंटे बाद आरोपी अपना ठिकाना बदल रहा है। मुरादाबाद, बदायूं जिले में भी पुलिस ने कई स्थानों पर दबिशें दीं, लेकिन बताया गया कि वह आधा घंटे पहले ही निकल चुका है। पुलिस लगातार उसकी लोकेशन व मिल रहीं सूचनाओं के आधार पर हर संभावित ठिकाने पर उसकी तलाश कर रही है।
शहर के नई बस्ती हनुमान गढ़ी मोहल्ला निवासी सपा नेता चंद्रपाल माली की शुक्रवार की शाम को उसके ही घर में गोली मारकर हत्या कर दी थी। हत्या की रिपोर्ट उसकी पत्नी सोनी व उसके प्रेमी दिलीप ठाकुर के खिलाफ दर्ज है। पत्नी तो गिरफ्तार हो चुकी है। लेकिन हत्या के तीसरे दिन भी मुख्य हत्यारोपी पुलिस पकड़ से दूर है। हालांकि पुलिस पर उसकी गिरफ्तारी को लेकर दबाव है। क्योंकि इस मामले में शासन स्तर से भी जानकारी की गई है। पुलिस ने पिछले चौबीस घंटे में संभल के साथ साथ मुरादाबाद व बदायूं जिले में भी आधा दर्जन से अधिक स्थानों पर दबिशें दी हैं। दो स्थानों पर पुलिस सिर्फ आंधे घंटे विलंब से पहुंची, उससे पहले ही हत्यारोपी वहां से निकल गया। हालांकि पुलिस लगातार उसकी सुरागरशी में जुटी है। कोतवाली प्रभारी विनय कुमार ने बताया कि वह लगातार भाग रहा है, अपनी लोकेशन भी लगातार बदल रहा है। शीघ्र ही पुलिस उसे गिरफ्तार कर लेगी।
मम्मी की याद तो आ रही है लेकिन जाएंगे नहीं
चंदौसी। मैने अपने पिता को गोली मारते नहीं देखा, लेकिन जब फायर की आवाज सुनकर वह बाहर निकला तो अंकल उमेश (नौकर) मम्मी को धक्का दे रहे थे। मेरी मम्मी-पापा ने कभी मुझे अकेला नहीं छोड़ा, लेकिन तीन दिन से ना तो पापा मिले और ना ही मम्मी। पिता तो अब नहीं हैं लेकिन मम्मी की भी बहुत याद आ रही है। इसके बाद भी मैं उनके पास जाऊंगा नहीं। यह कहना है कि मृतक सपा नेता के दस वर्षीय पुत्र का।
वह डरा और सहमा हुआ है, क्योंकि शुक्रवार को जब सपा नेता चंद्रपाल माली की हत्या की गई तो वह घर में ही ट्यूशन पढ़ रहा था। फायर की आवाज सुनकर तत्काल ही बाहर निकला तो हत्यारोपी तो भाग निकला लेकिन नौकर उमेश, हत्यारोपी को छुड़ाने के लिए लिपटी सोनी से खुद छुड़ाने की कोशिश कर रहा था। चंद्रपाल माली नीचे गिरकर तड़प रहा था। वह अपने पापा के पास भी दौड़ कर पहुंचा लेकिन तभी सपा नेता ने दम तोड़ दिया। रक्तरंजित पापा को देखकर बालक सहम गया। काफी भयभीत भी है। रविवार को तीसरे दिन कुछ सामान्य होने पर उसने बताया कि मेरे पापा को गोली किसने मारी यह उसने नहीं देखा। जब वह बाहर निकला तो उमेश अंकल मम्मी को धक्का दे रहे थे। पापा नीचे पड़े थे, खून निकल रहा था। सब कहते हैं कि पापा को दिलीप अंकल ने मारा है। मेरी मम्मी ने भी दिलीप अंकल का साथ दिया, इसलिए मैं मम्मी के पास नहीं जाऊंगा। मुझे मेरी मम्मी ने कभी अकेला नहीं छोड़ा, उनकी याद बहुत आती है, उनके साथ मैं पुलिस अंकल के साथ भी गया था, पुलिस अंकल से कहा था कि मेरी मम्मी को छोड़ दें, लेकिन उन्होंने छोड़ा नहीं। मैं अपने चाचा, दादा दादी के साथ ही रहूंगा।