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या हुसैन-या अली की सदाओं से गूंजी फिजा

Fri, 04 Dec 2015 12:12 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला संभल
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नूरियो सराय के इमामबाड़ों में गुरुवार को या हुसैन- या अली की गूंज के साथ चेहलुम का मातमी जुलूस निकाला गया। सुबह से ही मजलिसों का सिलसिला शुरू हो गया। जिक्रे हुसैन के साथ इमामबाड़ों में अजादारों ने मातम मनाया। दोपहर में फरमान हुसैन और इमामबाड़ा नंबरदरान में सैकड़ों लोग एकत्र हुए। मजसिल हुई।
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इसके बाद अलम उठाकर मातमी जुलूस निकाला गया। इमामबाड़ा सगीर हसन से हजरत इमाम हुसैन की सवारी दुलदुल व अलम ताबूत निकाले गए। हुसैनी चौक में अजादारों ने जंजीरों में बंधी छुरियों से मातम बरपा करके अपने लहूलुहान कर दिया। जिससे माहौल गमजदा हो गया।


यहां से जुलूस इमामबाड़ा फरमान हुसैन, सरवर हुसैन, जायरहुसैन, दरगाह सय्यद दादा शाहनूर, मौजिस संभली रोड, अली चौक होकर अपने तयशुदा मार्ग से देरशाम कर्बला पहुंचा। यहां पर अजादारों ने ताजियों को दफनाया। वापसी में अजादारों ने नौहा पढ़ा-अलविदा है अलविदा, या हुसैन, इब्ने अली अलविदा। दो जग के सुल्तान, हुसैन इब्ने अली अलविदा।
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इमामबाड़ों में फातेहा पड़ी गई। मातमी जुलूस में इस्माइल, सुहेल,. अब्बास, शाह आलम, रिजवी, पैकर संभली, नय्यर अब्बास, नवाब आलम, सरफराज, सलमान, हुसैन जहीर, कमर अब्बास, शाने अब्बास, साजिद, गुफरान, आमिर, इमाम हैदर, मजाहिर, फैसल अब्बास, अली मेहंदी आदि रहे।
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