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परिवार के सपने टूटे, कल्हा गांव में छाया मातम

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बबराला। गांव के एक ही परिवार के तीन लोगों की सड़क हादसे में मौत ने सभी को झकझोर कर रख दिया है। गमजदा लोगों की खामोशी और उनके चेहरे पर दुख की शिकन दर्द को बयां कर रही थी। एक घर में दो-दो मांग उजड़ गईं तो उनके परिवार का मुखिया भी नहीं रहा। पिता-पुत्र की मौत के बाद परिवार के सपने टूट गए।
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24 साल की उम्र में जान गवाने वाले अवधेश की पत्नी मिथलेश का तो बुरा हाल है। वह रोते-रोते बेसुध हो गई। एक साल पूर्व अवधेश के साथ बंधन बधने वाली मिथलेश एक दिन पूर्व ही अपने मायके से ससुराल आई है। अवधेश की मां दुर्गावती का रो-रोकर बुरा हाल है। बेटे को पुकारती दर्द भरी आवाज के साथ रोती आंखों ने सभी को पीड़ा से भर दिया। एक घर पर पिता-पुत्र की मौत के बाद छोटे भाई डालचंद्र, बिंटू के आलवा बिटिया प्रयागश्री की परवरिश के लिए कोई जिम्मेदार सदस्य घर में नहीं रहा। परिवार के सपने टूट गए। हादसे में मरे महेंद्र सिंह गांव व पूरे क्षेत्र में मुखिया के नाम से मशहूर थे। उन्हें लोग अपने विवाद निपटाने के लिए बुलाते थे। अब उनके जाने के बाद परिवार को पूरा बोझ उनके अकेले बेटे राजकुमार के कंधों पर आ गया है। परिजनों को रो-रोकर बुरा हाल है। गांव में हुई तीन मौतों के बाद हर कोई मौन है। गलियों में सन्नाटा पसरा है। चौपाल पर बैठे बुजुर्ग ने कहा कि मरने वाले लोग गांव में भी बेहद प्रिय थे। जिनका कोई विवाद नहीं था।
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