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पुलिस मुठभेड़ में मारे गए दो बदमाशों के गांवों में पुलिस ने बनाए रखी निगरानी

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संभल। बरेली में हुई पुलिस मुठभेड़ में संभल जिले के असमोली थाना क्षेत्र के गांव ऐेंचवाड़ा डींगर निवासी कपिल उर्फ खिलेंद्र और इसी थाना क्षेेत्र के गांव चितावली निवासी अशोक सिंह मारे गए। दोनों की मौत की सूचना रात ही पुलिस के जरिए परिजनों को मिली। पोस्टमार्टम के बाद दोनों के शव गांव में लाए जाने पर प्रतिक्रिया होने आशंका में पुलिस तथा प्रशासन ने एहतियाती सतर्कता बनाए रखी।
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संभल हसनपुर मार्ग स्थित गेलुआ में देर शाम पुलिस और पीएसी के साथ कई थानों की पुलिस तैनात की गई है। बरेली शहर के बीचोंबीच कोहड़ापीर पुलिया के पास सोमवार की सुबह साढ़े पांच बजे एक सराफ के साथ ऑटो पर जाते हुए उनके मुंशी को गोली मार लाखों रुपये की लूट की गई थी। इस घटना के बाद सोमवार को ही दोपहर ढाई बजे पुलिस ने लूट की वारदात में शामिल छह बदमाशों में से दो को मुठभेड़ में मार गिराया।
इनसे 15 लाख रुपये भी बरामद किए गए। पुलिस के मुताबिक मरने वाले बदमाशों की शिनाख्त ऐंचवाड़ा डींगर निवासी कपिल चौधरी और चितवली निवासी अशोक सिंह के तौर पर हुई। देर रात परिजनों को खबर लग गई।
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खबर मिलने के बाद परिजन स्तब्ध थे। दोनों के परिजन बरेली रवाना हुए। वहां से पोस्टमार्टम के बाद शव गांव लाए जाने की संभावना के मद्देनजर पुलिस प्रशासन ने एहतियाती तैयारी की। बरेली पुलिस से संपर्क साधकर जानने का प्रयास किया कि किस समय तक शव को लेकर परिजन गांव तक पहुंचेंगे। वहीं थाना प्रभारी राकेश कुमार सिंह ने गांव जाकर हालात को समझा तथा अधिकारियों को अवगत कराया। गांव वालों की ओर से कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई। परिजन भी सन्न थे।

परिवार के साथ गाजियाबाद में रहता था अशोक सिंह
संभल। मूल रूप से संभल जिले के चितावली गांव का निवासी अशोक गाजियाबाद के इंदिरापुरम थाना क्षेत्र में रहता था। वर्षों पहले उसने और उसके भाइयों ने गाजियाबाद में अपना ठिकाना बना लिया था। यह लोग कभी कभार गांव आते थे। उसके भाई राजकुमार ने बताया कि अशोक सिंह किसी फैमिली का प्राइवेट वाहन चलाता था। अशोक समेत कुल चार भाई हैं। तीन भाई ड्राइविंग करते हैं। चौथा भाई मनोज पेटिंग का काम करता है। पिता भी ड्राइवर हैं। वह सब गाजियाबाद में ही रहते थे। गांव में सिर्फ अशोक की दादी रहती हैं। गांव में कभी कभार ही आते हैं। गांव में एक छोटा सा मकान है। आखिरी वक्त सोमवार की सुबह सात से साढ़े सात बजे के बीच राजकुमार के पास अशोक की फोन कॉल आई थी। वह भर्राई आवाज में बोल रहा था। उसने बस इतना ही कहा था कि वह किसी बड़ी परेशानी में है। उससे पूछा कि क्या हो गया। इसका वह जवाब देता इससे पहले ही कॉल जाती रही पर इसके बाद कोई संपर्क नहीं हुआ।भाई ने बताया कि हम लोग कॉल मिलाते रहे लेकिन कॉल रिसीव नहीं हुई। उसे क्या परेशानी थी। यह उसने नहीं बताया।

भाई बोला, हमें नहीं पता अशोक कैसे आया कपिल के संपर्क में आया
संभल। इस बात से क्षेत्र के लोग वाकिफ नहीं हैं कि अशोक सिंह और कपिल चौधरी का कोई आपस में संपर्क था। कपिल उर्फ खिलेंद्र के नाम जिसकी हिस्ट्रीशीट खुली हुई है। उससे चितावली के अशोक का क्या संपर्क संबंध था। इस बारे में जब उसके भाई राजकुमार से पूछा गया तो उसने कहा कि हमें नहीं पता कि भाई उसके संपर्क में कब आया।

असमोली थाने में अशोक के खिलाफ नहीं है कोई मुकदमा
संभल। बरेली पुलिस के साथ मुठभेड़ में ढेर हुए अशोक सिंह के खिलाफ उसके असमोली थाने में कोई रिपोर्ट दर्ज नहीं है। एनसीआर तक होने का कोई अभिलेख नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि हिस्ट्रीशीट और आपराधिक अतीत के बारे में जब जानकारी की गई तो यह तथ्य सामने आए हैं।

सैदनगली पुलिस से था कपिल चौधरी का अच्छा संपर्क
संभल। हिस्ट्रीशीटर कपिल चौधरी का पुलिस और सियासी नेताओं में रसूख था। अमरोहा जिले के सैदनगली थाना में तैनात रहे कुछ सिपाही कपिल के संपर्क में थे और उसे पुलिस के एक्शन की पहले ही भनक लग जाती थी। जबकि कुछ सियासी नेताओं से भी उसका संपर्क था। अगर पुलिस इस बारे में छानबीन करती है तो अहम तथ्य सामने आ सकते हैं। कपिल असमोली थाने का हिस्ट्रीशीटर था और उसकी हिस्ट्रीशीट 16 नवंबर 2009 को 58 ए नंबर पर खोली गई थी। उसके खिलाफ असमोली में पांच और अन्य थानों के मिलाकर कुल 13 आपराधिक मामले दर्ज हैं। कहा तो यहां तक जाता है कि इतने मामलों में वांछित होने के बाद वह इसलिए नहीं पकड़ा गया क्योंकि पुलिस के कुछ लोग उसे बचाते रहे। कपिल चौधरी सैदनगली थाना पुलिस के कुछ सिपाहियों के संपर्क में रहा है। कॉल डिटेल से इसका खुलासा हो सकता है। यह जांच का विषय है।

सिर्फ परिजन ही जुटे, तमाम लोगों ने किया परहेज
संभल। चितावली में अशोक का घर हो या फिर ऐंचवाड़ा डींगर का कपिल उर्फ खिलेंद्र उसकी मुठभेड़ में मौत की खबर मिलने पर दोनों गांवों के अधिकतर लोगों ने कुछ भी कहने और यहां तक की उनके घर जाने में परहेज किया लेकिन परिजन जुट गए थे। दोपहर में दोनों के घर कुछ महिलाएं और रिश्तेदार ही नजर आए। जबकि कुछ लोग सोमवार की रात ही बरेली चले गए थे। दोनों घरों में शोक का माहौल था।

सियासत करना चाहता था कपिल
संभल। कपिल सियासत में दखल देने के प्रयास में था। उसने सैदनगली के एक नेता के माध्यम से संपर्क किया था। लेकिन अभी वह खुलकर सियासत में नहीं आ सका था क्योंकि अपराध के कई मामले उसके खिलाफ दर्ज थे। क्षेत्र में जब भी कोई अपराध होता था तो पुलिस उसे तलाशने का प्रयास करती थी। थानाध्यक्ष राकेश कुमार सिंह ने बताया कि उन्होंने भी उसकी तलाशा की थी पर वह गांव में हाथ नहीं था। कपिल का इतना खौफ था कि उसके बारे में कोई कुछ बोलने को राजी नहीं होता था। क्षेत्र में छोटे-मोटे अपराधी भी उससे घबराते थे। पुलिस के एक अधिकारियों ने बताया कि वह इतना दबंग था कि अपराधियों से भी वसूली कर लेता था।
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