संभल/गुन्नौर। गुन्नौर कोतवाली क्षेत्र के एक गांव से जानलेवा हमले के वांछित आरोपियों को पकड़ने गई पुलिस टीम पर भीड़ ने हमला कर दिया। पहले पथराव किया बाद में लाठी डंडों लेकर निकल आए और मारपीट की। लेकिन पुलिसकर्मियों ने साहस दिखाते हुए भीड़ से हार नहीं मानी। आरोपियों को भीड़ से बचाते हुए पुलिसकर्मी निकल गए। इसकी सूचना कोतवाली को दी। आनन-फानन में कोतवाली से अधिक पुलिस बल मौके पर पहुंचा।
पुलिस को देख भीड़ में भगदड़ मच गई। अब पुुलिस ने भीड़ में शामिल लोगों को चिह्नित किया है। कई गंभीर धाराओं में रिपोर्ट दर्ज की है। भीड़ के इस हमले में तीन पुलिसकर्मियों को चोट है। गुन्नौर थाना क्षेत्र के गांव अजमेरी नगला में वांछित आरोपियों को पकड़ने गई पुलिस टीम पर भीड़ ने हमला कर दिया। इसमें पुलिसकर्मी नवनीत कुमार, मदन गोपाल और दीनदयाल घायल हुए हैं। सिपाहियों का मेडिकल कराया गया है।
दरअसल महीने भर से राजकुमार, अखिलेश और अनिल जानलेवा हमले में वांछित चल रहे थे। मौके से मिली जानकारी के मुताबिक गुरुवार को सुबह पुलिस को सूचना मिली कि जानलेवा हमले के आरोपी अपने खेत पर गेहूं की थ्रेसिंग करा रहे है। पुलिस टीम का नेतृत्व कर रहे एसआई ब्रजपाल तीन सिपाहियों के साथ आरोपी पकड़ने के लिए रवाना हो गए। आरोपियों ने पुलिस को आता देखा तो फायरिंग शुरू कर दी। लेकिन पुलिस टीम ने घेराबंदी कर तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
पकड़े जाने की जानकारी आरोपियों के परिजनों को हुई तो वह भीड़ के साथ मौके पर पहुंच गए। भीड़ ने जानलेवा हमले के आरोपियों को छुड़ाने का प्रयास किया लेकिन पुलिस ने सख्ती दिखाई तो भीड़ ने पथराव शुरू कर दिया।
पुलिसकर्मी आरोपियों को गाड़ी से निकल कर भागे तो भीड़ ने लाठी डंडों से मारपीट की। इसी दौरान कुछ ग्रामीणों ने बीच में पड़कर पुलिस टीम को बचाया भी है।। पुलिस टीम ने थाना पुलिस को हमले की जानकारी दी। पुलिस के मुताबिक हमले में शामिल गजेंद्र और बुद्धि को हमले के बाद गिरफ्तार किया गया है। अन्य कोई आरोपी पुलिस के हाथ नहीं आया। अब इस मामले में पुलिस ने राजकुमार, अनिल और अखिलेश के अलावा कुंवरपाल, गट्टू उर्फ तेजपाल, प्रेमपाल, भूरे, महावीर, जयनारण, दिनेश, महेश, व 12-13 अज्ञात लोगों के खिलाफ जानलेवा हमला, सरकारी कार्य में बाधा, बलवे के हालात पैदा करने और अन्य कई धाराओं में रिपोर्ट दर्ज की है।
जानलेवा हमले के तीन आरोपी पकड़ने चार पुलिसकर्मी पहुंचे
संभल। जानलेवा हमले के आरोपी महीने भर से भागे हुए थे। पुलिस लगातार दबिश दे रही थी। अचानक सूचना पर सक्रिय हुए एसआई ब्रजपाल तीन सिपाहियों को साथ लेकर आरोपी पकड़ने के लिए पहुंच गए। पुलिसकर्मियों की कम संख्या ही हमले का मुख्य कारण बनी। यदि पुलिस टीम में कई सदस्य होते तो भीड़ मारपीट और पथराव न करती। गांव के लोग पुलिस को बचाने के लिए नहीं आए होते तो आरोपियों को भीड़ ने छुड़ा लिया होता। गांव के लोगों ने पुलिस की मदद की, जिससे वह घटनास्थल से निकल सके।