संभल के हातिम सराय में मकान पर लाल निशान लगाता कर्मचारी। फाइल फोटो
संभल। रायसत्ती थाना क्षेत्र के मोहल्ला हातिम सराय में बने 80 मकानों को अवैध बताना तहसील प्रशासन की चूक साबित हुई है। नक्शा पास मकानों को भी अवैध बताने का मामला हाईकोर्ट पहुंचा तो कोर्ट ने तहसीलदार को एक महीने में नक्शा पास कराने वाले लोगों के जवाब का निस्तारण करने का आदेश किया है। साथ ही निस्तारण करने तक कोई भी कार्रवाई करने पर रोक रहेगी। मतलब मकानों को तोड़ा नहीं जा सकता है।
कोर्ट ने तो यह भी कहा है कि मकानों का नक्शा तहसीलदार से बड़े अधिकारी एसडीएम द्वारा स्वीकृत किए जाते हैं। इसके बाद भी तहसीलदार ने कार्रवाई किस आधार कर दी है।
रेशमा परवीन, आरिफ, अतहर आदि ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। सुनवाई पर कोर्ट को बताया गया कि उन्होंने 2019 में मकानों के नक्शे स्वीकृत कराए थे। इसके आधार पर ही निर्माण हुए हैं लेकिन आठ अक्तूबर को तहसीलदार धीरेंद्र कुमार सिंह ने अवैध बताते हुए क्रॉस के निशान लगवा दिए थे। जबकि नक्शे नियमानुसार स्वीकृत हैं। मकान स्वामियों का कहना है कि नक्शे और बैनामे की कॉपी के साथ जवाब दाखिल किया जा चुका है। इसके बाद भी तहसीलदार द्वारा निस्तारण नहीं किया गया है।
मालूम हो तहसीलदार ने दावा किया था कि हातिम सराय में बने 80 मकान सरकारी तालाब को पाटकर बनाए गए हैं। इसके चलते ही 40 मकानों पर क्रॉस के निशान लगा दिए गए थे। हालांकि कार्रवाई के समय ही लोगों ने दावा किया था कि जमीन हातिम सराय निवासी राम सुनीति देवी से वर्ष 2005 के बाद से खरीदनी शुरू की थी। बैनामे भी हो चुके हैं। जमीन रामसुनीति देवी से खरीदी थी। इसकी तस्दीक राम सुनीति देवी की पोती सरायतरीन निवासी पूर्वी वार्ष्णेय ने भी की थी।
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एडीएम के 2009 के आदेश का भी तहसीलदार नहीं कर सके पालन
संभल। हातिम सराय में स्थित जिस जमीन पर मकानों का निर्माण किया गया है। उस जमीन का गाटा संख्या 84, 85 व और 86 अंकित है। इस जमीन को लेकर वर्ष 2009 में तत्कालीन एडीएम हरज्ञान सिंह पुंडीर की कोर्ट में सुनवाई हुई थी। 14 सितंबर 2009 को राम सुनीति देवी की निजी संपत्ति होने का आदेश किया गया था। साथ ही उस समय जो 25 नोटिस जारी किए गए थे, उनको निरस्त कर दिया गया था। इसमें कहा गया था कि पीपी एक्ट के तहत जारी किए गए 25 नोटिस वापस किए जाएं। एडीएम की कोर्ट में यह मामला 25 नोटिस जारी होने के बाद पहुंचा था लेकिन जांच पड़ताल हुई तो निजी जमीन होने के प्रमाण पाए गए थे। इस आदेश का भी तहसीलदार पालन नहीं कर सके, जबकि तहसील में इस आदेश की कॉपी मौजूद है। तहसील से ही आदेश की कॉपी मकान स्वामियों तक पहुंची है। संवाद
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