यह था मामला
सोमवार को हरगोविंदपुर गांव में काली मंदिर के सामने वाली सड़क निर्माण के दौरान भराव के लिए आई मिट्टी आई थी। इस सड़क के लिए मिट्टी गांव लहरा नगला श्याम निवासी मनीराम सिंह के खेत आई थी। शाम के समय जब मजदूर मिट्टी उतार रहे थे। इसी दौरान सिक्के मिलने शुरू हुए।
मौके से बदायूं निवासी सड़क निर्माण करा रहा ठेकेदार और मजदूर सिक्के लेकर चले गए। मंगलवार को ग्राम प्रधान कमलेश ने जुनावई थाने में तहरीर देकर सोने-चांदी के सिक्के मिट्टी से मिलने की जानकारी दी। इसके बाद पुलिस-प्रशासन सक्रिय हो गया।
एसडीएम ने मौके पर पहुंचकर एक ग्रामीण से सिक्का जब्त कराया। बुधवार को सिक्के की जांच कराई गई तो वह चांदी का होने की पुष्टि हुई है। ग्राम प्रधान ने सड़क निर्माण कराने वाले ठेकेदार पर 100 से ज्यादा सिक्के ले जाने का आरोप लगाया था। हालांकि पुलिस ने 81 ही सिक्के बरामद किए हैं।
सिक्कों पर क्या लिखा इसकी जानकारी नहीं
पुरातत्वविद् व इतिहासकार चंदौसी अतुल मिश्र ने बताया कि जुनावई के गांव हरगोविंदपुर से मिले सिक्कों पर क्या लिखा है, इसकी जानकारी नहीं है। इस तरह का एक सिक्का मेरे पास भी हैं और वह सिक्का अलाउद्दीन खिलजी के शासनकाल का है। अलाउद्दीन खिलजी (वास्तविक नाम अलीगुर्शप 1296-1316) था। वह दिल्ली सल्तनत के खिलजी वंश का दूसरा शासक था। सिक्कों की जांच होने पर ही स्पष्ट हो सकेगा कि यह सिक्के किस काल के हैं।
सल्तनत काल में चलने वाले सिक्के जैसे हैं
इतिहास प्रवक्ता डा. मोनिका यादव ने बताया कि यह सिक्के सल्तनत काल में चलने वाले सिक्कों के जैसे हैं। गोल सिक्का अलाउद्दीन खिलजी के शासनकाल में चलता था। यह सिक्का भी वैसा है। इस क्षेत्र में काफी समय सल्तनत काल का शासन रहा है। बदायूं में कुछ स्थानों पर पुराने किलों के खंड़हर आज भी हैं। सुल्ताना रजिया का संबंध भी बदायूं क्षेत्र से रहा हैं। जुनावई क्षेत्र में मिलने वाले सिक्के किस शासनकाल के हैं इसकी जांच में ही पुष्टि हो सकेगी।
सिक्कों पर अरबी में लिखा
सिक्के पर अरबी से सुल्तान ए आजम अलाउद्दीन वददुनिया अबुल मुजफ्फर मोहम्मद शाह सुल्तान लिखा है, जबकि सिक्कों पर कुछ शब्द स्पष्ट नहीं है।
सिक्के बरामद कराए जा रहे हैं। पुरात्व विभाग को सूचना देकर सिक्कों की जांच कराई जाएगी कि किस शासन काल के हैं। प्राथमिक जांच में सामने आया है कि सिक्के चांदी के हैं। - रमेश बाबू, एसडीएम गुन्नौर