स्टेटिक मजिस्ट्रेट से नोकझोंक करते पूर्व सांसद डा.शफीकुर्रहमान बर्क।
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पुलिस ने उसे सीज किया है। इस वाहन पर चिपकी हुई परमीशन फर्जी थी। इसी कारण वाहन को सीज करते हुए वाहन चालक पर धोखाधड़ी का की रिपोर्ट दर्ज की गई है।
स्टेटिक मजिस्ट्रेट महादेव वर्मा एसडीएम कार्यालय के पास मुख्य सड़क पर चुनाव आचार संहिता संबंधी चेकिंग कर रहे थे। चेकिंग के दौरान एक आर्टिका गाड़ी गुजरी, जो एआईएमआईएम प्रत्याशी जियाउर्रमहान बर्क के चुनाव प्रचार में लगी हुई थी। इस वाहन पर शीशे पर एक अनुमति पत्र चिपका हुआ था। जब इसकी जांच की गई तो यह अनुमति फर्जी निकली।
महादेव वर्मा ने यह जानकारी देते हुए बताया कि उनके पास उन सभी गाड़ियों की सूची थी, जिन्हें चुनाव प्रचार के लिए अनुमति दी गई है। इस सूची में जब पकड़ी गई आर्टिका का नंबर मिलाया और परमीशन प्रपत्र को चेक किया तो वह फर्जी निकला। इस पर वाहन को पुलिस के हवाले में कर लिया। वाहन को सीज किया गया। इस मामले में एसआई वीरेंद्र सिंह ने रिपोर्ट दर्ज कराई है। इसमें चालक नूरे नबी पुत्र मोहम्मद अनीस निवासी नाहरठेर को नामजद किया गया है। इसमें चालक पर लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम और धोखाधड़ी की धाराओं में रिपोर्ट दर्ज की गई है। चालक को गिरफ्तार कर लिया गया है।
वाहन पर लगी परमीशन में एसडीएम के फर्जी हस्ताक्षर थे। मुहर भी फर्जी थी। जिस वाहन पर इस परमीशन को चस्पा किया था। उसके लिए अनुमति संबंधी कोई आवेदन भी नहीं किया गया था, जबकि ऑनलाइन आवेदन का ऑप्शन सभी के लिए खुला हुआ है।
वाहन को छुड़वाने के लिए पूर्व सांसद ने मजिस्ट्रेट की मुलाकात
संभल। जिस वक्त मजिस्ट्रेट ने वाहन को पकडा उसके कुछ ही देर बाद पूर्व सांसद शफीकुर्रहमान बर्क चुनावी जनसंपर्क के लिए निकले हुए थे। वाहन पकड़े जाने के कुछ देर बाद ही वह एसडीएम कार्यालय के परिसर में पहुंचे। वहां पर उन्होंने स्टेटिक मजिस्ट्रेट महादेव वर्मा से कहा कि उनके समर्थक गलत तरीके से नहीं चलते हैं। वाहन नंबर गलत चढ़ गया होगा। यदि कोई कमी न हो तो जांच करके वाहन को छोड़ दिया जाए। इस पर स्टेटिक मजिस्ट्रेट ने कहा कि वह जांच के बाद उचित कार्रवाई करेंगे।