जिलाधिकारी 10.35 बजे स्कूल पहुंचे। वहां उन्होंने बच्चों की हाजिरी चेक की। जिस क्लास में जितने बच्चे पंजीकृत थे उस क्लास में उसके आधे बच्चे भी नहीं थे। इस पर डीएम ने नाराजगी जाहिर की।
सतरेश नाम की लड़की स्कूल परिसर में ही खड़ी थी जिसका नाम नहीं लिखा था। जिलाधिकारी ने उसे अपने पास बुलाकर बातचीत की और उसकी मां को भी बुलाया, जिसमें पता लगा कि लड़की का पिता उसको पढ़ाना नहीं चाहता है। इस पर जिलाधिकारी ने मां को पढ़ाई लिखाई का महत्व समझाया और लड़की का नाम पहली कक्षा में अपने हाथ लिखा।
डीएम के हाथों दाखिले संभल जिले में यह मामला है। जिलाधिकारी अपने हाथों से दाखिला करके यह संदेश दिया है कि सब पढ़ें और सब आगे बढ़ें। स्कूल चलो अभियान में शासन की भी यही मंशा है।