बहजोई। तुम्हरे भजन राम को भावे, जन्म-जन्म के दुख बिसरावे चौपाई के माध्यम से तुलसी पीठाधीश्वर जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने कहा कि हनुमान जी जाप जन्म-जन्म का पाप धो देता है। इससे व्यक्ति मृत्यु के बाद रघुवर के धाम को जाता है और राम भक्त होकर ही अगला जन्म लेता है।
बुधवार को दोपहर बाद करीब साढ़े चार बजे से हीरादेवी तोताराम कन्या इंटर कॉलेज परिसर में चल रही श्रीराम कथा के चौथे दिन जगद्गुरु राम भद्राचार्य ने कहा कि हनुमान जी को खुश करने के लिए लड्डुओं की आवश्यकता नहीं होती, बस रामायण ही सुनते रहिये। वीर हनुमान स्वयं प्रसन्न हो जाएंगे। हनुमान जी खाने के रसिया नहीं हैं, उन्हें तो भगवान श्रीराम का चरित सुनाना चाहिए। माता जी राम नाम का जाप कर रही हैं। वहीं सूर्य देव की लालिमा देखी तो हनुमान जी उछल गए। एक छलांग में वीर हनुमान चार हजार योजन दूर सूर्य भगवान के पास आ गए। यह देख इंद्र ने हनुमान जी पर वज्र फेंका। वीर हनुमान के प्रताप से वज्र टूट गया।
जगद्गुरु ने कहा कि इंद्र के वज्र के प्रहार से भी हनुमान का हनु नहीं टूटा। इंद्र के वज्र की ही दांतियां टूट गईं। तब इंद्र ने प्रसन्न होकर हनुमान जी का कीर्तन किया कि, जय हनुमान, जय-जय हनुमान, संकट मोचन कृपा निधान।
तुलसी पीठाधीश्वर कथा को आगे बढ़ाते हुए बोले, इंद्र के वज्र से हनुमान जी का हनु नहीं टूटा। वह इसलिए, कि हनुमान जी का शरीर जन्म से वज्र है। उनका शरीर इंद्र के वज्र से भी कठोर है। इसलिए वाल्मीकि जी ने कहा कि इंद्र के वज्र का हनुमान जी पर कोई असर नहीं हुआ। वीर हनुमान हंसते रहे और हनुमान जी ने सूर्य देव को मुंह में रख लिया।
जगद्गुरू ने कहा कि सूर्य देव को मुंह में रखने वाले हनुमान जी जानते हैं कि सूर्य नारायण उत्पन्न राम नाम से ही हुए हैं। उन्होंने कहा कि हनुमान जी ने सूर्य देव को नहीं देखा, सूर्य मंदिर में सीता राम को देखा। हनुमान जी ने सूर्य को मुंह से उगल दिया और सीता राम जी को ह्दय में बैठा लिया। तब देवताओं ने प्रार्थना की। सीता राम हनुमान, सीता राम हनुमान।
इसके बाद वीर हनुमान ने गायत्री मंत्र की व्याख्या जानी। गायत्री मंत्र की व्याख्या सुनने के बाद हनुमान जी को लगा, कि श्रीराम सूर्य भगवान से भी बड़े देवता हैं, तो श्रीराम का ही ध्यान करना चाहिए।
इसके बाद कुछ बड़े होने पर हनुमान जी का सूर्य देव से शिक्षा ग्रहण करने का प्रसंग सुनाते हुए जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने कहा कि पढ़ाई करने के लिए वीर हनुमान सूर्य देव के पास गए। सूर्य देव उदय होने की तैयारी कर रहे थे। हनुमान जी को देख सूर्य देव ने सोचा कि बाल्य काल में तो हनुमान ने मुझे मुंह में रख लिया था, अब तो वीर हनुमान बड़े हो गए हैं। वहीं, हनुमान जी को पढ़ाने में सूर्य देव आनाकानी करते हुए बोले, कि मेरे पास किताबें नहीं हैं, तो हनुमान ने कहा कि सभी प्रकार की किताबें मैं ले आया हूं। बाद में पढ़ाई के एवज में सूर्य देव ने हनुमान जी से दक्षिणा मांगी और कहा कि मेरे बेटे सुग्रीव को रामजी से मिला देना। इसके लिए तुम किष्किंधा पर्वत पर चले जाओ। इस पर हनुमान जी सुग्रीव से मिलने किष्किंधा पर्वत पर चले गए। इसके बाद महाआरती हुई। वहीं, बीच-बीच में हुए भजनों पर श्रोता जमकर झूमे। इस बीच जगदगुरू ने कहा कि व्याकरण न जानने के कारण हम भारतीय संस्कृति को न्याय नहीं दे सके। श्रीराम कथा में सेवानिवृत डीआईजी शिवकुमार वार्ष्णेय समेत प्रमोद रोरा, तीरथ वार्ष्णेय, कपिल गुप्ता, आशीष हिटलर, सचिन कुमार नन्हा व सुनील ब्रेड रहे।
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राज्यमंत्री गुलाब देवी व पूर्व एमएलसी ने लिया कथा का रसपान
राज्यमंत्री गुलाब देवी समेत पूर्व एमएलसी परमेश्वर लाल सैनी, विकास वार्ष्णेय, भुवनेश राघव, मंजू दिलेर चौहान व कमल कुमार कमल आदि भाजपाइयों ने भी कथा स्थल पर पहुंचकर श्रीराम कथा का रसपान कर महाआरती की। वहीं, अधिकारियों में डीएम डॉ. राजेंद्र पैंसिया, सीओ संभल अनुज चौधरी, एसडीएम संभल वंदना मिश्रा व डीपीओ चंद्रभूषण आदि भी कथा सुनने पंडाल में पहुंचे और जगद्गुरु का आशीर्वाद लिया।
रघुवर या यदुवर के होकर रहो, बाबर या अकबर के नहीं
भव्य श्रीराम कथा के बखान के दौरान जगदगुरू रामभद्राचार्य ने कहा कि भारत में रघुवर या यदुवर के होकर रहो, बाबर या अकबर के नहीं। उन्होंने कहा कि जिन्हें वंदे मातरम कहने में सांप्रदायिकता लगती है, उन्हें भारत में रहने का कोई अधिकार नहीं। बोले, कि धारा 370 हमने हटाई, तीन तलाक कानून हमने बनाया। वहीं, वक्फ बोर्ड का कानून हमने पास कराया।
श्रीराम कथा का रसपान करने कई जिलों से आए श्रोता
श्रीराम कथा का रसपान करने श्रोता संभल जिला के नगर व ग्रामीण अंचलों समेत बदायूं, अलीगढ़, अमरोहा व बुलंदशहर आदि जिलों के क्षेत्रों से भी पंडाल में पहुंचे। श्रीराम कथा का बखान सुनकर श्रोता प्रफुल्लित हो रहे थे।