संभल/चंदौसी/जुनावई। तेज हवा के साथ मूसलाधार बारिश और कुछ स्थानों पर ओलावृष्टि से गुरुवार की रात संभल जिले में फसलों को व्यापक नुकसान हुआ है। अधिक क्षति गेहूं को हुई है। फसल खेतों में बिछ गई है। पैदावार घटेगी इस बात को अब कृषि एवं राजस्व विभाग भी स्वीकार कर रहा है।
संभल जिले में 1,40,000 हेक्टेयर जमीन पर गेहूं और 13.000 हेक्टेयूर भूमि पर सरसों की खेती होती है। किसानों ने बताया कि 12 व 13 दिसंबर 2019 को हुई बारिश और ओलावृष्टि में आलू, गेहूं और सरसों की फसल बर्बाद हुई थी। अब 5 मार्च की रात तेज हवा के साथ बारिश हुई। खेतों में गेहूं की फसल गिर गई। जिलाधिकारी अविनाश कृष्ण सिंह ने शुक्रवार को सुबह ही जिला कृषि अधिकारी और सभी तहसीलों के उप जिलाधिकारियों को क्षति का आकलन करने और रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए हैं। इसके बाद दैवी आपदा से मदद दिलाने के लिए शासन को रिपोर्ट भेजी जाएगी। जिला कृषि अधिकारी नरेंद्र प्रताप ने बताया कि जिन किसानों ने किसान क्रेडिट कार्ड लिया है उनकी फसल का अनिवार्य रूप से बीमा प्रीमियम जमा है लेकिन क्षतिपूर्ति तभी मिलेगी जब खेत का सर्वेक्षण हो जाएगा। जिनके खेतों में क्षति हुई है उनके खेतों तक बीमा कंपनी के प्रतिनिधि, कृषि विभाग के कर्मचारी और राजस्व विभाग के लेखपाल पहुंचेंगे। वे क्षति के बारे में अपनी रिपोर्ट देंगे। इसके बाद क्षति पूर्ति दिलाए जाने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
क्या कहते हैं किसान
दाना काला पड़ेगा तो कैसे बिकेगा गेहूं
चंदौसी। अकरौली के किसान एहसान मियां ने बताया कि 15 बीघे गेहूं की फसल लगाई थी। इससे पहले हुई बारिश और तेज हवा के कारण फसल खेत में ही गिर गई थी। गिरी हुई फसल पर अब गेहूं का दाना काला पड़ने के आसार हैं। काले दाने के गेहूं की मांग नहीं होती। उपज को औने पौने दाम में बेचना पड़ेगा।
लागत निकाल पाना भी हो गया मुश्किल
बनियाखेड़ा गांव के निवासी खेमकरन ने बताया की ग्यारह बीघा खेत के लिए पचास हजार रुपये एक वर्ष का किराया दिया था लेकिन घुमंतू पशुओं तथा मौसमी झंझावतों ने धान की फसल बर्बाद कर दी अब बीस हजार रुपये की लागत लगाकर मटर की फसल की है। तेज हवा के साथ पड़ी बारिश और खेत में जलभराव के कारण खराब हो गई है। ऐसे में अपनी लागत निकालना भी मुश्किल हो रहा है।
क्षतिपूर्ति के लिए प्रार्थना पत्र दें किसान
चंदौसी। जिला कृषि अधिकारी नरेंद्र प्रताप ने कहा कि जिन किसानों ने कृषि बीमा कराया है और ओलावृष्टि और बारिश के साथ तेज हवा होने से खेतों में क्षति हुई है। ऐसे किसान कृषि विभाग के क्षेत्रीय कर्मचारी और कृषि विभाग के कार्यालय पर प्रार्थना पत्र दें। इन किसानों के खेतों का सर्वे करा लिया जाएगा और बीमा कंपनी का क्लेम दिलाने की प्रक्रिया अपनाई जाएगी।