इसमें 99.9 प्रतिशत चांदी निकली है। अब व्यापारी टेस्ट रिपोर्ट को आधार बनाकर खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण तक अपनी पैरवी करना चाहते हैं।
खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण ने अपनी गाइडलाइन में कहा था कि चमड़े के बीच में चांदी को रखकर कूटने के बाद तैयार किए गए चांदी के वर्क का मिठाइयों में इस्तेमाल न किया जाए।
इससे सेहत को खतरा जताया था। इससे कारोबार पर मंडराते खतरे को देखते हुए कारोबारियों और वर्क निर्माताओं ने बैठक कर संघर्ष समिति का प्रारूप तय किया गया। इसी समिति ने दिल्ली के श्रीराम इंस्टीट्यूट फॉर इंडस्ट्रीयल रिसर्च में चांदी वर्क का टेस्ट कराया। टेस्ट रिपोर्ट में साफ किया गया है कि इसमें चांदी के कंपोमेंट ही हैं। व्यापारियों का दावा है कि चांदी वर्क से सेहत के लिए कोई खतरा नहीं है। इस संबंध में व्यापारी निजी टेस्ट रिपोर्ट को आधार बनाकर आगे की पैरवी करेंगे।
जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. राजवीर सिंह ने बताया कि यदि 99.9 प्रतिशत चांदी का वर्क है तो उसका इस्तेमाल सेहत के लिए खराब नहीं है। इसे मिठाई आदि में प्रयोग किया जा सकता है। चांदी वर्क तो हमारे यहां खाद्य पदार्थों और दवाओं में परंपरागत तरीके से इस्तेमाल होता रहा है।