चंदौसी। अपने शौक पूरे करने के लिए घर से ही चोरी करनी सीखी, जो आज उसकी मौत का कारण बन गई। काश, उसी समय उस पर सख्ती की होती तो आज यह अंजाम देखना नहीं पड़ता। यह कहना है कि अमरोहा में पुलिस इनकाउंटर में ढेर हुए उसके पिता जंग बहादुर उर्फ भूकन का।
अमरोहा में बेटे कमल को पुलिस ने मौत के घाट उतार दिया, क्योंकि उसने गुनाह ही इतना बड़ा किया था। उसने 17 जुलाई को दो पुलिस कर्मियों की हत्या कर दी थी और अपने दो साथियों के साथ फरार हो गया था। कमल के पिता भूकन का कहना है कि बेटे की मौत की सूचना मिली तो एक धक्का तो जरूर लगा लेकिन कोई अचरज नहीं हुआ। क्योंकि जिस दिन वह पुलिस कर्मियों को मारकर भागा था, उसी दिन परिजन समझ गए थे कि अब कमल जीवित नहीं लौट पाएगा।
उसकी उम्र अभी करीब पच्चीस छब्बीस साल ही थी, जिसमें वह कुंदरकी की इंजीनियर ही हत्या में पहली बार जेल गया और पांच सालों से लगातार जेल में था। जब वह सिर्फ सात आठ साल का था, तभी से उसने घर में खेतों से आने वाले गेहूं आदि चोरी करके बेचने शुरू कर दिए थे। कई बार उसने घर के कीमती बर्तनों को भी बेच दिया। सिर्फ अपने शौक पूरे करने के लिए।
इस पर कई बार उसकी पिटाई भी की लेकिन वह चोरी करके स्वीकार भी नहीं करता था। उसे समझाने का काफी प्रयास किया। इससे पहले वह सुधर पाता कि वह रंपुरा गांव के शकील के संपर्क में आ गया। जिससे वह भी जरायम की दुनियां में घुसता चला गया।
उसके पिता ने बताया कि उन्होंने उसकी जमानत का कोई बेहतर प्रयास इसलिए भी नहीं किया कि समझाने का उस पर कोई असर नहीं होता था, इसलिए परिजन भी यही चाहते थे कि वह जेल में ही रहे, जिससे कम से कम सुरक्षित तो रहेगा। उसे जेल में मिलाई करने के लिए परिजन जाते रहते थे। लेकिन अब खेल खत्म हो गया, उसके शौक ने पच्चीस साल में ही उसकी जिंदगी ले ली।