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चामुंडा देवी मंदिर : जंगल के बीच प्रकटी थी माता की मूर्ति

Sun, 06 Oct 2024 04:46 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, संभल
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संभल। मोहल्ला हल्लूसराय स्थित मां चामुंडा देवी मंदिर का इतिहास करीब 800 वर्ष पुराना है। बताते हैं कि घने जंगल के बीच माता की मूर्ति की प्रकटी थी। यहां पर मां दुर्गा की सात बहनों के भी थान हैं। मान्यता है कि यहां पर पूजा अर्चना करने से मनोकामना पूर्ति व रोगों से निदान मिल जाता है।
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बीते एक दशक से संभल के हल्लूसराय स्थित प्रसिद्ध श्री चामुंडा देवी मंदिर के प्रति लोगों की आस्था बढ़ी है। मंदिर में वर्तमान में चामुंडा देवी मंदिर, दुर्गा मां, काली मां के तीन भवन, मां संतोषी, बजरंग बली, शिव परिवार, शनिदेव, भगवान श्री कल्कि-पदमापति, राधा-कृष्ण, लक्ष्मी नारायण, हनुमान जी आदि के भवन हैं। मंदिर के निकट ही मां दुर्गा की सात बहनों के थान है, जिन्हें बेरियों वाली देवियां कहा जाता है, लेकिन अब यहां से बेरियां तो कट चुकी है और थानों को पक्का कराया गया है। मंदिर के महंत मुरली सिंह बताते हैं कि मंदिर बाहरी आबादी में हैं। विशेष बात यह है कि नवरात्र में दूर-दराज के श्रद्धालु मंदिर में आते हैं और पूजा-अर्चना करते हैं।

जो चढ़ावा आता है उसी से ही होते विकास कार्य : महंत मुरली
चामुंडा देवी मंदिर की देखरेख कर रहे महंत मुरली ने बताया कि मंदिर की भव्यता व सुविधाओं के लिए बहुत कुछ करना शेष हैं, लेकिन धन की कमी आड़े आती है, जिससे कार्यों की गति काफी धीमी हैं। यहां नवरात्र में ही श्रद्धालु आते हैं, जो चढ़ावा आता है, उससे धीरे धीरे निर्माण कार्य कराए जा रहे हैं, नवरात्र में सजावट, प्रसाद वितरण, रोशनी का प्रबंध आदि भी चढ़ावे के धन से ही होता है। सामाजिक संस्थाओं की भी कोई खास रुचि नहीं हैं, हां अमरनाथ सेवा समिति ने पिछले दिनों मंदिर में विशेष सहयोग दिया। महंत ने बताया कि उनके साथ राजीव भटनागर, शिवओम गुप्ता, रामकिशन, विनोद आदि सहयोग करते हैं।
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