संभल। महाराजा सत्यवादी हरिश्चंद्र समिति के द्वारा मंगलवार को दुर्गा कॉलोनी स्थित पैलेस में महाराजा हरिश्चंद्र की जयंती मनाई गई। इसमें उनके जीवन और त्याग पर प्रकाश डाला। युवाओं से उनके आदर्शों को जीवन मेें अपनाने का आह्वान किया। वहीं, रंगारंग कार्यक्रम हुए। फैंसी ड्रेस, देशभक्ति गीत और महिलाओं ने नृत्य कर चार चांद लगाए।
मनोज कुमार रस्तोगी ने कहा कि जब राजा हरिश्चंद्र की सत्यवादिता की चर्चा बढ़ी तो भगवान ने उनकी परीक्षा लेने की ठानी। ऋषि विश्वामित्र को परीक्षा लेने के लिए भेजा। उन्होंने सपने में राजा हरिश्चंद्र से वचन लिया और सारा राजपाठ ले लिया। इसके बाद ऋषि हरिश्चंद्र के दरबार में पहुंचे और वचन के अनुसार राजा हरिश्चंद्र ने अपना सारा राजपाट लिया। बाद में विश्वामित्र ने उनसे दक्षिणा मांगी। इस पर दक्षिणा देने के लिए हरिश्चंद्र ने स्वयं को, पत्नी तारा और पुत्र रोहिताश को अलग-अलग लोगों के पास गिरवी रख दिया और उससे मिली धनराशि उन्होंने दक्षिणा के रूप में दे दी।
इसके बाद हरिश्चंद्र श्मशान में ठेकेदार के पास, पत्नी और पुत्र दूसरी जगह नौकरी करने लगे। इसी दौरान रोहिताश की मृत्यु हो गई। तारा अपने पुत्र के शव का अंतिम संस्कार उसी श्मशान में करने गई, जहां उनके पति नौकरी कर रहे थे। हरिश्चंद्र ने अपने मालिक की आज्ञा के अनुसार तारा से शव का अंतिम संस्कार करने के एवज में शुल्क मांगा। तारा के पास शुल्क देने के लिए राशि नहीं थी, इस पर तारा शुल्क के एवज में अपनी साड़ी का कुछ हिस्सा फाड़कर पति को देने लगी। इसी बीच भगवान प्रकट हो गए। उन्होंने हरिश्चंद्र से कहा कि वह उनकी परीक्षा ले रहे थे, जिसमें वह पूरी तरह सफल हो गए। उसके बाद भगवान ने उनका सारा राजपाट उन्हें वापस कर दिया और उनके पुत्र को भी जीवित कर दिया।
इस दौरान पवन रस्तोगी, वीरेंद्र रस्तोगी, प्रशांत रस्तोगी, विकास रस्तोगी, मोहन रस्तोगी, मनीष रस्तोगी, अंकुर रस्तोगी, विवेक रस्तोगी, शीलू रस्तोगी, सुमि रस्तोगी, ज्योति रस्तोगी, शिखा रस्तोगी आदि रही।