बबराला में ध्रुव की मौत पर विलाप करते परिजन।
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ध्रुव की मौत के बाद शनिवार को कस्बा के सैकड़ों की संख्या में व्यापारी और समाजसेवी एकत्रित हुए और पुलिस चौकी पहुंच गए। घेराव जैसा माहौल बन गया। व्यापारियों ने चौकी प्रभारी सचिन बालियान को ज्ञापन सौंपा। जिसमें उन्होंने मांग की कि गंगा तट पर गहरे स्थानों घाट पर संकेत बोर्ड लगवाए जाए। प्रशासन द्वारा गोताखोरों की तैनाती की जाए। साथ ही उन्होंने निजी कंपनी पर कार्रवाई की मांग की।
नमामि गंगे परियोजना के तहत गंगा नदी पर स्नान घाट का निर्माण कराया जा रहा है। निजी कंपनी के द्वारा कराए जा रहे निर्माण कार्य में लापरवाही ही जानलेवा हो गई। अगर कंपनी के कर्मियों के द्वारा दिशा-निर्देशों के तहत सावधानी बरती गई हो तो शायद ध्रुव कुमार की जान बच सकती थी। यह ध्रुव के परिजनों का आरोप है। इस बारे में लिखित पत्र परिजनों ने चौकी इंचार्ज बबराला को दिया।
राजघाट गंगा नदी पर जहां स्नान घाट का निर्माण कराया जा रहा है वहां कंपनी ने ऐसा कोई संकेत नहीं लगाया जिससे यह पता लग सके कि स्नान घाट के लिए कोई गहरा गड्ढा नदी में करके बालू आदि को इधर से उधर किया गया है या फिर किया जाएगा। पता यह चला है कि जहां मात्र पांच फीट गहराई तक जल रहता है, वहीं पर एक गहरा गड्ढा इसलिए हो गया था कि निजी कंपनी के द्वारा वहां से कुछ बालू आदि स्नान घाट बनाने के लिए उठाई गई थी। इसके लिए मशीनों द्वारा गहरा गड्ढा कर दिया था है।
इसके बावजूद गड्ढे के संबंध में कोई संकेत बोर्ड नहीं लगाया था।ऐसा कहा जा रहा है कि गंगा नदी के किनारे की पांच फीट गहराई थी। अचानक एक गड्ढे में स्नान करने वाले आ गए। ध्रुव वार्ष्णेय व उनके साथियों का गहराई का अंदाजा नहीं हुआ। स्नान करते-करते तीनों युवक गड्ढे की ओर चले गए।