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Sambhal News: बसें खरीदी नहीं... अनुबंध करने के साथ रूट निर्धारण भी कर दिया

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चंदौसी। परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना के तहत जिन दो बसों का संचालन चंदौसी से इस्लामनगर और सहसवान रूट पर शुरू होना था, वे बसें अभी तक खरीदी ही नहीं गई हैं। अधिकारियों ने बसों के बिना ही अनुबंध कर दिया और रूट भी निर्धारित कर दिए। जब हकीकत सामने आई तो पता चला कि बस खरीदने के लिए अनुबंधकर्ताओं की ओर से बैंक में दिए गए ऋण आवेदन ही स्वीकृत नहीं हुए।
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नगर से इस्लामनगर और सहसवान मार्ग पर वर्षों से रोडवेज बस सेवा नहीं है। इसका खामियाजा रोजाना हजारों यात्रियों को भुगतना पड़ रहा है। महिलाओं, बुजुर्गों, छात्र-छात्राओं और नौकरीपेशा लोगों को निजी डग्गामार वाहनों के भरोसे सफर करना पड़ता है। इन वाहनों में न तो समय की कोई निश्चितता रहती है और न ही यात्रियों की सुरक्षा का ध्यान रखा जाता है।
क्षमता से अधिक सवारियां बैठाकर वाहन संचालित किए जाते हैं और यात्रियों से मनमाना किराया वसूला जाता है। यात्रियों की इसी समस्या को देखते हुए मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना के तहत करीब एक माह पहले नगर से इस्लामनगर और सहसवान रूट पर दो नई बसें संचालित करने की योजना बनाई गई थी।
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योजना के अनुसार एक बस चंदौसी से बिसौली होते हुए इस्लामनगर तक तथा दूसरी बस चंदौसी से इस्लामनगर होते हुए सहसवान तक चलाई जानी थी। इससे वर्षों से बस सेवा से वंचित लोगों को राहत मिलने की उम्मीद जगी थी, लेकिन विभागीय लापरवाही के चलते योजना धरातल पर नहीं उतर सकी।

बसों के बिना ही पूरी कर दी प्रक्रिया
दोनों रूटों पर बस संचालन के लिए एक व्यक्ति ने आवेदन किया था। परिवहन निगम के अधिकारियों ने बसों की उपलब्धता सुनिश्चित किए बिना ही अनुबंध की प्रक्रिया पूरी कर दी। इतना ही नहीं, दोनों बसों के संचालन के लिए रूट भी निर्धारित कर दिए गए। बाद में पता चला कि अनुबंधकर्ताओं ने बस खरीदने के लिए बैंक से ऋण लेने का आवेदन किया था, लेकिन ऋण स्वीकृत ही नहीं हुआ। परिणामस्वरूप बसें खरीदी ही नहीं जा सकीं और पूरा मामला कागजों तक सीमित रह गया।
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वर्षों से बस सेवा का इंतजार
चंदौसी से इस्लामनगर की दूरी करीब 17 किलोमीटर और सहसवान की दूरी लगभग 50 किलोमीटर है। इन दोनों मार्गों पर आज तक नियमित रोडवेज बस सेवा शुरू नहीं हो सकी है। इस्लामनगर जाने वाले यात्रियों को बदायूं रोड स्थित पथरा तिराहे से निजी बसों का सहारा लेना पड़ता है, जिनका संचालन पूरी तरह अनियमित है। वहीं सहसवान जाने वालों को पहले इस्लामनगर तक डग्गामार वाहन से पहुंचना पड़ता है, फिर वहां से दूसरा वाहन बदलकर आगे का सफर तय करना पड़ता है। कई बार वाहन चालक सवारियां पूरी भरने तक घंटों इंतजार कराते हैं, जिससे यात्रियों का समय और पैसा दोनों बर्बाद होता है।

मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना के तहत दोनों रूटों पर बस संचालन के लिए जिन वाहनों का अनुबंध किया गया था, वे बसें अभी खरीदी नहीं गई हैं। अनुबंधकर्ताओं का कहना है कि उन्हें वाहन खरीदने के लिए बैंक से ऋण स्वीकृत नहीं हो सका है। इसी कारण दोनों रूटों पर बस संचालन शुरू नहीं हो पाया है। बसें उपलब्ध होने के बाद ही संचालन शुरू कराया जाएगा।
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- प्रेम सिंह, एआरएम मुरादाबाद
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