जिले के पनसुखा मिलक गांव में शुक्रवार को दोपहर शहीद सुधीश कुमार के परिजनों ने भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष और राज्यसभा सदस्य शिवप्रताप शुक्ला के आश्वासन पर अपना अनशन तोड़ दिया। उन्होंने कहा कि वह पीएम मोदी के दूत बन कर आए हैं। शहीद परिवार की जो भी मांग होगी उसे पूरी कराएंगे।
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को गांव में बुलाने पर अड़ा शहीद परिवार बुधवार से अनशन पर था। शहीद की मां संतो देवी, पत्नी कविता की तबीयत बृहस्पतिवार को बिगड़ गई थी। शुक्रवार को दोपहर 12.50 बजे वरिष्ठ भाजपा नेता शिवप्रताप शुक्ला ने पनसुखा मिलक जाकर शहीद सुधीश कुमार के पिता ब्रह्मपाल सिंह से मुलाकात की। शहीद परिवार से अनशन तोड़ने का आग्रह करते हुए उन्होंने कहा कि सीएम आएं या न आएं, इससे क्या फर्क पड़ता है। हम आपके साथ हैं। करीब आठ मिनट की वार्ता के बाद शहीद के पिता अनशन तोड़ने पर राजी हो गए। इसके बाद उन्होंने शहीद की मां संतो देवी और पत्नी कविता व बहन बबीता को जूस पिलाकर अनशन खत्म करा दिया।
बुधवार को सुबह 8.00 बजे शहीद की मां और पत्नी ने सीएम को बुलाने के लिए अन्न त्यागा। गुरुवार को शाम 6.00 बजे हालत बिगड़ने पर गांव पहुंची डाक्टरों की टीम, अन्न लेने का आग्रह। शुक्रवार को सुबह 10.00 बजे डाक्टरों की टीम ने चेकअप किया, हालत और बिगड़ी।शुक्रवार को दोपहर 1.05 बजे भाजपा नेता शिवप्रताप शुक्ला जूस पिलाकर अनशन तुड़वाया
शहीद के पिता से बोले शिवप्रताप : मैं भी हूं आपका बेटा
संभल। भाजपा के राज्यसभा सदस्य शिवप्रताप शुक्ला ने करीब पौन घंटा शहीद सुधीश कुमार के गांव में बिताया। उनके आने से पहले ही स्थानीय भाजपाइयों ने शहीद के परिजनों को अनशन तोड़ने के लिए मनाया लेकिन बात तब बनी जब शहीद के पिता से शिवप्रताप शुक्ला बोले-मैं भी आपका बेटा हूं।
शहीद के परिजन फिर बोले-हम नहीं जाएंगे लखनऊ
संभल। शहीद सुधीश कुमार के परिजन सीएम से मिलने के लिए लखनऊ जाने के लिए राजी नहीं हैं। लखनऊ में सीएम से मिलकर लौटे सपा नेता दिग्विजय भाटी शुक्रवार को दोपहर बाद फिर शहीद के गांव पहुंचे। उन्होंने जब शहीद के परिजनों से उनसे लखनऊ चलने का आग्रह किया तो परिजनोंने साफ इनकार दिया।
शहीद के भाई मनोज कुमार का कहना था कि हमारे परिवार ने शुरू से ही कहा था कि मुख्यमंत्री से मिलने लखनऊ नहीं जाएंगे। यदि मुख्यमंत्री गांव आते हैं तो उनका बहुत ज्यादा सम्मान होगा। जिस वक्त मनोज यह बयान दे रहे थे, उस वक्त शहीद के पिता ब्रह्मपाल सिंह भी मौजूद थे। मनोज ने यह भी कहा कि शहीद के परिजनों पर प्रशासन ने लखनऊ चलने का दबाव बनाया था लेकिन हम अपने स्टैंड पर कायम हैं।