सरकारी अस्पताल में जिस रैंप को मरीजों की व्हील चेयर और स्ट्रेचर के लिए बनाया गया है। उसी रैंप पर बाइकें फर्राटा भर रहीं हैं। शोर और प्रदूषण से मरीजों को तकलीफ हो रही है पर न तो अस्पताल प्रशासन को परवाह है और न ही उन लोगों को जो बाइकों पर फर्राटा भर कर अव्यवस्था पैदा कर रहे हैं।
बाइकें अस्पताल की तीसरी मंजिल में डिलीवरी रूम के करीब तक पहुंच रही हैं। अस्पताल की चौथी मंजिल पर शुक्रवार को दोपहर आशाओं की ट्रेनिंग चल रही थी। ट्रेनिंग के लिए आशाएं अपने परिजनों के साथ आईं। कई आशाओं ने अस्पताल की तीसरी मंजिल तक बाइकों से सफर किया। बाइकों की पार्किंग अस्पताल की तीसरी मंजिल पर ही की गई है।
अस्पताल प्रशासन इससे बेखबर रहा। जबकि शोर गुल से जच्चा-बच्चा और मरीजों को दिक्कत हो रही थी। शाम साढ़े पांच बजे जब अस्पताल के चिकित्साधीक्षक डा. कप्तान सिंह से पूछा गया तो उन्होंने बताया कि अस्पताल की चौथी मंजिल पर ट्रेनिंग के लिए डीसीपीएम अरबाब मेहंदी को अनुमति दी गई थी।
अनुमति देते वक्त ही उन्हें बता दिया गया था कि बाइकें छत तक नहीं जाएंगी लेकिन इसके बावजूद नियमों का उल्लंघन हुआ है। इस बारे में वह अरबाब मेहंदी से जवाब मांग रहे हैं और तत्काल प्रभाव से बाइकों को ऊपर तक जाने से रोक रहे हैं। ताकि किसी मरीज को कोई असुविधा न होने पाए। उनका कहना था कि अस्पताल की छत तक कोई बाइक नहीं जाएगी।