मलेशिया में बनने वाले सिंथेटिक मैंथॉल का इंपैक्ट नए वर्ष में एशिया की मैंथा इंडस्ट्री पर नजर आएगा। भारतीय मैंथा कारोबारी सतर्क हो गए हैं और नई प्रजाति के माध्यम से अपनी उत्पादन लागत घटाने की जुगत में लग गए हैं।
जर्मनी की बीएसएफ कंपनी की ओर से मलेशिया में एक प्लांट लगना प्रस्तावित था। इंडस्ट्री से मिली जानकारी के मुताबिक यह प्लांट बन कर तैयार हो गया है। इसमें नए वर्ष में उत्पादन शुरू हो जाएगा। मलेशिया में बनने वाला सिंथेटिक मैंथॉल एशिया की मैंथॉल मार्केट में असर डालेगा। इसे लेकर भारत की मैंथा इंडस्ट्री सतर्क है। चुनौती से निबटने के उपाय तलाशे जा रहे हैं। निर्यातकों में इसे लेकर आपसी संवाद भी शुरू हो चुका है।
निर्यातकों ने बताया कि भारत एक ऐसा देश है जहां से संसार के सभी देशों के लिए मैंथॉल की आपूर्ति की जाती है। लेकिन इसे जर्मनी के सिंथेटिक मैंथॉल की चुनौती मिलने लगी है। जर्मनी की बीएसएफ कंपनी का सिंथेटिक मैंथॉल अब तक बड़ी कम मात्रा में एशिया की मार्केट में आता था लेकिन मलेशिया में प्लांट चालू होने पर यह मात्रा बढ़ेगी और प्राकृतिक मैंथाल के लिए मुश्किल होगी।
बचाव के लिए यह चाहती है इंडस्ट्री
मैंथॉल के आयात पर एंटी डंपिंग ड्यूटी लगाई जाए
मैंथॉल से तैयार होने वाले प्रोडक्ट पर लिखा जाए कि उसमें सिंथेटिक मैंथाल का इस्तेमाल है या फिर नेचुरल मैंथाल का
मैंथा आयल की उत्पादन लागत 550-600 रुपये प्रति किलोग्राम से घटाकर 400 रुपये प्रति किलोग्राम लाई जाए
विश्व में मैंथा कारोबार से जुड़े कुछ तथ्य
वर्ल्ड में मैंथॉल प्रोडक्ट की कुल खपत 40,000 मीट्रिक टन
भारत में मैंथॉल की कुल खपत 10,000 से 12,000 मीट्रिक टन
मैंथॉल की कुल खपत का 55 से 60 प्रतिशत एशिया के मार्केट में
सिथेंटिक मैंथॉल का दाम 14 से 15 डालर प्रति किलोग्राम
नेचुरल मैंथॉल का दाम 18.5 से 19.00 डालर प्रति किलोग्राम
सिंथेटिक मैंथॉल का कुल उत्पादन 12,000 मीट्रिक टन
भारत में सिंथेटिक मैंथॉल की कुल खतत 200-300 मीट्रिक टन
वर्ल्ड में सिंथेटिक मैंथॉल का उत्पादन जर्मनी, जापान और यूएसए में किया जा रहा है।
(सभी आंकड़े उद्यमियों से हुई बातचीत पर आधारित हैं)