अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से मॉडल पब्लिक एजुकेशन कॉलेज में बुधवार को अपराजिता का आयोजन किया गया, जिसमें एसडीएम मोनालिसा जौहरी मुख्यातिथि रहीं। उन्होंने कहा कि घर में बेटे व बेटी दोनों को बराबर समझकर परवरिश करनी चाहिए। अभी दूर दराज के कुछ गांवों में लड़कियों की शिक्षा की ओर कम ध्यान दिया जाता है। ऐसे में जहां भी, जब भी अवसर मिले, उसमें अपना शत प्रतिशत योगदान करें। अब जरूरी नहीं किसी भी प्रतियोगिता की तैयारी के लिए घर से बाहर जाया जाए और कोचिंग इंस्टीट्यूट पर जाकर तैयारी करें। सब कुछ ऑनलाइन उपलब्ध है। बशर्ते आपका लक्ष्य निर्धारित हो। प्रतियोगिताओं के लिए किताबाें का लगातार अध्ययन करें। एक बार में समझ में न बाए, तो उसे बार-बार पढ़े। हतोत्साहित न हों। मोबाइल पर ऑनलाइन क्लाॅसिज में मदद ले सकते हैं।
घर ऐसा माहौल बनाएं, जहां आप और परिवार के अन्य सभी सदस्य एक दूसरे से अपनी बातें शेयर कर सकें। छात्राएं, युवतियों और महिलाओं को घर से बाहर निकलते समय कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। ऐसे में कोई भी आपको परेशान करें या छेड़छाड़ करें, तो उसका विरोध करें। उन्होंने विद्यार्थियों के साथ कॉलेज से लेकर प्रशासनिक के कार्यकाल तक के अनुभव शेयर किए और उनसे सीधे बातचीत की। इस मौके पर कॉलेज चेयरमैन अशोक यादव, वरिष्ठ महिला अधिवक्ता रंजना शर्मा, कॉलेज प्राचार्य एसबीएन श्रीवास्तव व अन्य स्टाफ मौजूद रहा।
उत्पीड़न का करें विरोध, हेल्प लाइन नंबर पर लें मदद
वरिष्ठ महिला अधिवक्ता रंजना शर्मा ने बताया कि महिला सुरक्षा के लिए शासन ने ट्रोल फ्री नंबर 1090, 112 जारी किए हैं। इसके अलावा थानों में महिला हेल्प डेस्क हैं, जहां आप शिकायत कर सकते हैं। आपकी पहचान गुप्त रखी जाएगी। हमें समाज में अपने आसपास होने वाले महिला अपराधों के खिलाफ भी आवाज उठानी चाहिए। उन्होंने कहा कि महिला अधिकार का लाभ लें, पर उनका दुरुपयोग न करें।
- मैं एमएड की छात्रा हूं। बाहर जाने में दिक्कत थी, अभी तक केवल शिक्षा के क्षेत्र में कॅरियर बनाने का सोचा था। लेकिन अमर उजाला के कार्यक्रम में प्रशासनिक अधिकारी से सीधे बातचीत के बाद मेरा हौसला बढ़ा है। साधनों का सही उपयोग करके घर रहकर भी लक्ष्य को पाया जा सकता है।
- अनुराधा अग्रवाल
- अधिकांशत: घर परिवार, पति-पत्नी में विवाद का कारण सिर्फ मोबाइल हैं। इस बात को जानते हुए भी समझते नहीं है। अपराजिता कार्यक्रम में अधिवक्ता ने उदाहरण के साथ यह बात समझाई। हम स्वयं आधे से अधिक विवादों को स्वत: खत्म कर सकते हैं। बशर्ते में हमें स्वयं थोड़ा सा प्रयास करने की जरूरत हैं। मैं अपने सहयोगियों से भी इस विषय पर बात करुंगी।
-मधुर राठौर