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जितनी जल्दी हो सकें, बुरी आदतें त्याग देना चाहिए : आचार्य कवित

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संभल। गांव मोहम्मदपुर टांडा में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन कथाव्यास आचार्य कवित ने कहा कि दूसरों को बुरा भला कहना, दूसरों की निंदा करना, बुरे वचन बोलना, यह सब त्यागने के योग्य हैं। दूसरों का अपमान करना, अहंकार और दंभ, यह अवगुण है। बुरी आदतों को जितनी जल्दी हो सके त्याग देना चाहिए।
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कथा में आचार्य ने सुनाया कि एक दिन पांडव युद्ध में विजय श्री प्राप्त करके दुखी हो रहे थे। वह अपने आप को युद्ध का कारण मानते थे। इसलिए भगवान श्रीकृष्ण ने भीष्म पितामह के द्वारा उनको उपदेश कराया। पितामह कहते हैं कि सत्य धर्म सब धर्मों से उत्तम धर्म है। सत्य ब्रह्म है, सत्य तप है, सत्य से मनुष्य स्वर्ग को जाता है। झूठ अंधकार की तरह है और अंधकार में रहने से मनुष्य नीचे गिरता है।
कथाव्यास ने महाराज परीक्षित के जन्म की कथा सुनाई। शुकदेव जी का चरित्र सुनाया। जिसको सुनकर श्रद्धालु प्रसन्न हो उठे। कथा के मुख्य यजमान अनिल शर्मा, भूराज चौधरी, शिवम शर्मा, सुधीश शर्मा रहे। इस दौरान कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष विजय शर्मा ने भागवत भगवान की आरती की।
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