अधिकतर एटीएम बंद ही रहे और जो चले भी वहां भीड़ रही। आरबीआई से कैश न मिलने के कारण अभी कई दिन तक जनता को परेशानी झेलनी पड़ेगी।
शनिवार और रविवार को बैंक बंद होने की जानकारी के बाद लोगों को उम्मीद थी कि एटीएम से कैश निकाल सकेंगे। बावजूद इसके अधिकतर एटीएम में कैश डाला ही नहीं गया। काफी एटीएम ऐसे रहे, जिनके शटर तक नहीं उठे। कुछ एटीएम खुले भी रहे लेकिन उनमें कैश नहीं था। निराश होने के बाद लोग घरों को लौट रहे थे।
उधर, कुछ स्थानों पर एटीएम चले तो वहां पर लंबी-लंबी कतारें लग गईं। मुरादबाद रोड स्थित एसबीआई के एटीएम पर दिनभर भीड़ रही। पंजाब नेशनल बैंक का एटीएम खुला लेकिन कैश नहीं मिला। इसके अलावा कैनरा बैंक, सिंडीकेट बैंक, यूनियन बैंक, बैंक आफ बड़ौदा, एक्सिस, एचडीएफसी सहित अन्य बैंकों के एटीएम के तो शटर ही नहीं उठे। बता दें कि आठ नवंबर को 500 और 1000 रुपये के नोट बंदी की घोषणा के साथ ही प्रधानमंत्री ने एटीएम से प्रतिदिन दो हजार के निकासी की घोषणा की थी।
लेकिन एटीएम के सॉफ्टवेयर में जरूरी संशोधन न होने की वजह से अधिकतर बैंकों के एटीएम अभी तक काम नहीं कर रहे हैं। बैकों में भी पैसा कम होने की वजह से अधिकारियों ने जमा निकासी के लिए सीमा निर्धारित कर दी है। ऐसी स्थिति में एटीएम ही एक मात्र सहारा है।
दो दिन की छुट्टी के बाद आज खुलेंगे बैंक, बढ़ेगी भीड़, मचेगी मारामारी
संभल (ब्यूरो)। दो दिन तक बैंकों में छुट्टी के बाद सोमवार से बैंक खुल जाएंगे। छुट्टियों की वजह से बैंकों में भीड़ बढ़ने की संभावना है। अभी लोगों के पास 500 और 1000 के पुराने नोट बचे हुए हैं। इनकी बैंकों में बदली तो नहीं हो रही है, लेकिन खातों में जमा करने की छूट अभी जारी है। इसके अलावा भुगतान पाने वाले भी बैंक पहुंचेंगे। एटीएम से सिर्फ दो हजार रुपए की निकासी होने से लोगों को कोई खास राहत नहीं मिल पा रही है। जिन लोगों को ज्यादा खर्च की जरूरत है उनके लिए दो हजार रुपए कोई मायना नहीं रखते।
बैंक के अधिकारियों ने बताया कि एटीएम से निकासी की सीमा कम होने के कारण एटीएम में डाला गया रुपया कई घंटे तक चल रहा है। नगर में जो भी एटीएम चल रहे हैं उनके सामने लोगों की कतारें लग रही हैं। एटीएम से 2000 का नया नोट और 100 रुपए के नोट ही निकल पा रहे हैं। लोगों के पास अब थोड़ी रकम होने से बाजार में भी कुछ खरीददारी होने लगी है।
हालांकि बड़ी रकम का सामान अभी बिकना शुरू नहीं हो पाया है। लोगों का कहना है कि जब तक बैंकों में छोटे नोट पर्याप्त मात्रा में नहीं आ जाते तब तक बाजार की स्थिति में सुधार संभव नहीं है। दूसरा यह कि अभी निकासी की सीमा बहुत कम है। इस कारण भी लोग हाथ रोककर खर्च कर रहे हैं।