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Sambhal News: प्रदूषण बढ़ते ही मरीजों को होने लगी सांस की तकलीफ

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चंदौसी। दिवाली के बाद हवा में घुला प्रदूषण अब लोगों की सांसों पर भारी पड़ने लगा है। सीएचसी में हर रोज 10 से 15 मरीज सांस की तकलीफ, खांसी और सीने में जकड़न की शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं। इनमें ज्यादातर अस्थमा और टीबी से पीड़ित मरीज हैं, जिन्हें पटाखों के धुएं और धूल के कारण दिक्कत बढ़ी है।
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रोशनी और खुशियों का त्योहार दिवाली बीतते ही अब प्रदूषण की मार लोगों की सेहत पर दिखने लगी है। जहां एक ओर दीपों की लौ ने वातावरण को रोशन कर दिया, वहीं दूसरी ओर पटाखों से निकला जहरीला धुआं हवा में जहर घोल रहा है। इसका सबसे ज्यादा असर अस्थमा और सांस से जुड़ी बीमारियों से पीड़ित मरीजों पर पड़ रहा है। दिवाली के बाद से ही सीएचसी में सांस व अस्थमा के मरीज पहुंचने शुरू हो गए। कई मरीजों को सांस लेने में तकलीफ, सीने में जकड़न और खांसी की शिकायत हो रही है।
सीएमएस डॉ. हरविंदर सिंह ने बताया कि पटाखे जलाने से हवा में कार्बन, सल्फर और अन्य हानिकारक कणों की मात्रा कई गुना बढ़ गई है। प्रदूषित हवा सांस, खांसी, गले में खराश, आंखों में जलन और एलर्जी जैसी समस्याएं बढ़ा रही है। ऐसे हर रोज 10 से 15 मरीज सीएचसी आ रहे हैं। उन्हें दवा के साथ- साथ ऑक्सीजन और इन्हेलर की मदद से राहत दी जा रही है।
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क्या करें, क्या न करें



-घर से बाहर निकलते समय मास्क अवश्य पहनें, ताकि धूल और धुआं फेफड़ों में न जाए।
-दरवाजे और खिड़कियां बंद रखें, खासकर सुबह और शाम के समय जब प्रदूषण अधिक होता है।
-अपनी नियमित दवाओं और इन्हेलर का समय पर उपयोग करें और उन्हें हमेशा अपने पास रखें।

-तले-भुने और मसालेदार भोजन से परहेज करें, ताकि गले और फेफड़ों पर अतिरिक्त दबाव न पड़े।
-सांस लेने में दिक्कत या सीने में भारीपन महसूस हो तो तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें।

-गर्म पानी या भाप लेने की आदत बनाए रखें।
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