चंदौसी। उन्हें किसी तरह को कोई लालच नहीं है। वह प्रोफेशनल मूर्तिकार या झांकी कलाकार भी नहीं है। कोई कारोबारी है तो कोई नौकरीपेशा लेकिन जैसे ही गणेशोत्सव नजदीक आने लगता है तो हर साल गणेश मंदिर के सामने गजानन हॉल में पहुंच जाते हैं। बिना किसी पारिश्रमिक के करीब दो महीने तक रात्रि के समय स्वचालित झांकियों का निर्माण करते हैं। उनकी कड़ी मेहनत और हुनर का ही कमाल है कि आज चंदौसी की गणेश रथयात्रा भारत की दूसरी सबसे बड़ी रथयात्राओं में शुमार हो चुकी है, जिसे देखने के लिए देशभर से लोग यहां पहुंचते हैं।
हीरा लाल शहर के नामी हलवाई हैं, लेकिन बीते कई सालों से गणेश रथयात्रा के लिए सबसे मुख्य झांकी तैयार करते हैं। वह टीम निदेशक हैं। उनकी टीम में बैंक कर्मचारी अरुण कुमार, खिलौना विक्रेता बिट्टू, प्लास्टिक आईटम विक्रेता सोनू, सीसीटीवी मैकेनिक पुनीत आदि शामिल हैं। जो दिनभर अपना कारोबार व नौकरी करते हैं लेकिन रात्रि को नौ बजे के करीब गजानन हॉल पहुंचकर झांकी निर्माण में जुट जाते हैं। इस बार हीरा लाल की टीम हनुमान जी की झांकी को हवन सामग्री से तैयार कर रही है। इसे धूप, अगरबत्ती, रुई की बत्तियों से तैयार कर रही है।
इसके अलावा दूसरी बड़ी झांकी भगवान श्री गणेश की है, जो जिसे बिजली के सामान की दुकान चलाने वाले अजय आर्य के निर्देशन में तैयार किया जा रहा है। उनकी टीम में शुभम अग्रवाल, सराफ मोहन लाल, बान विक्रेता सुशील, अलमीरा विक्रेता राजीव कृष्णा, मोबाइल कारोबारी नवीन वार्ष्णेय, ट्रांसपोर्टर विक्की चौधरी आदि शामिल हैं। भगवान श्रीगणेश की पूरी झांकी छोटी एलईडी से तैयार की जा रही है, इसमें करीब 50 हजार छोटे एलईडी बल्ब लगाए जा रहे हैं।
तीसरी झांकी शिव लिंग पर भगवान श्रीगणेश द्वारा आरती करने के की है, यह पूरी झांकी प्लेन मिरर (आइना) से तैयार की जा रही है। ठेकेदारी करने वाले दीपू इसके निदेशक हैं। उनकी टीम में डिश का काम करने वाले हरिओम शर्मा, अशेष दत्त दुबे, पेंटर कपिल वार्ष्णेय आदि शामिल हैं। कुल मिलाकर करीब दो दर्जन झांकियां तैयार की जा रही है, जिसमें शहर के करीब ढाई सौ लोग अपने हुनर का शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं। सभी जी जान से रथयात्रा की झांकियों को मन मोहक बनाने का हर संभव प्रयास कर रहे हैं।