जामा मस्जिद की दुकानों के पास काफी समय से बंद पड़े प्राचीन कुएं की बुधवार को पालिका की टीम ने खोदाई शुरू कर दी है। साथ ही कुएं के नजदीक बनी जर्जर दुकानों को ध्वस्त कराया गया था। उसके अवशेष को भी पालिका की टीम ने हटाया है। जिससे कुएं की खोदाई में बाधा न रहे और सौंदर्यीकरण के दौरान भी दिक्कत न आए। डीएम डॉ. राजेंद्र पैंसिया ने बताया कि संभल महात्म्य में 68 तीर्थ और 19 कूप का उल्लेख है।
सभी कूप तलाश लिए गए हैं। 34 तीर्थ भी चिह्नित कर लिए हैं। अन्य तीर्थ को भी चिह्नित करने के लिए काम किया जा रहा है। इन सभी तीर्थ और कूप के साथ सामान्य कुएं भी संवारे जाने हैं। जो पालिका के क्षेत्र में हैं उनको पालिका संवारेगी और जो देहात क्षेत्र में हैं उनको ग्राम पंचायत और मनरेगा से संवारने का काम किया जाएगा।
तीर्थ, कूप और कुएं को संवारने के लिए काम किया जा रहा है। जिससे जल संरक्षण का भी काम हो सके और प्राचीन विरासत भी संरक्षित हो सकें। इसके लिए टीम लगातार काम कर रही है। सरायतरीन में मिले कुएं की भी जानकारी कराई जाएगी। यह किस समय का बना हुआ है। -डॉ. राजेंद्र पैंसिया, डीएम
सरायतरीन में मिले कुएं की टीम ने बारीकी से जांच की
सरायतरीन में जामा मस्जिद के नजदीक जिस कुएं का निरीक्षण एएसआई की टीम ने किया है वह आकार में काफी बड़ा है। चर्चा है कि इस कुएं की तरह बनावट भी किसी कुएं या कूप की नहीं दिखी है। इस कुएं को काफी समय पहले पाट दिया गया है। लेकिन बनावट इसकी अभी भी स्पष्ट दिख रही है। चर्चा है कि शहर में सबसे प्राचीन कुआं यही है।
हालांकि एएसआई की टीम ने कार्बन डेटिंग के लिए तो नमूना नहीं लिया है लेकिन इसका बारीकी से निरीक्षण जरूर किया है। इस कुएं की पालिका द्वारा खोदाई कराई जाएगी। साथ ही संभल महत्म्य किताब और प्राचीन नक्शों में उल्लेख किए गए कूप से भी मिलान किया जाएगा। जिससे यह स्पष्ट हो सके कि यह कूप है या प्राचीन कुआं है।