धनारी (संभल)। क्षेत्र के गांव औरंगाबाद में गृहकलह के चलते दो भाइयों की मौत के बाद आसपास के घरों में दूसरे दिन भी चूल्हे नहीं जले। रह रहकर मृतकों के घर से दोनों विधवाओं व अन्य महिलाओं का रुदन सुनाई देता रहा है। दहेज के विवाद को लेकर मायके रह रही सरोज पति की मौत पर एक साल बाद मायके पहुंची।
गांव औरंगाबाद में बृहस्पतिवार की शाम गृहकलह के चलते विजय सिंह के दो बेटों ने आत्महत्या कर ली थी और तीसरे बेटे को ग्रामीणों ने बचा लिया था। परिजनों ने पुलिस को सूचना दिए बिना ही दोनाें का अंतिम संस्कार कर दिया था। तब से अभी तक महिलाओं का विलाप जारी है। रविवार को मृतकों की मां, दादी, पत्नी, बहन बदहवास हालत में नजर आईं। घर में किसी के भी पहुंचने पर महिलाओं का चीखना चिल्लाना शुरू हो जाता था। दिन भी यही स्थिति बनी रही। आसपास की महिलाओं दिन भर मृतकों के घर बैठी परिवार के सदस्यों को ढाढ़स बंधाती रही। महिलाएं भी परिवार के सदस्यों की वेदना के आगे अपनी आंसू नहीं रोक पाई। मोहल्ले व आसपास के घरों में चूल्हे तक नहीं जले।
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काश बेस्वाद चाय को लेकर न करता शिकायत तो जिंदा होते दोनों बेटे
धनारी। मृतकों के पिता विजय सिंह के आंसू रुकने का नाम नहीं ले रहे हैं। वह बार-बार एक ही बात कहते हैं कि काश बेस्वाद चाय को पत्नी के ऊपर न फेंकता तो उसके दोनों बेटे जिंदा होते और तीसरा बेटा भी अस्पताल में भर्ती नहीं होता। उन्हें जीवन भर इसी बात का अफसोस रहेगा।
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पति की मौत पर एक साल बाद ससुराल पहुंची सरोज
धनारी। विजय सिंह के बड़े बेटे मुनीश की शादी करीब पांच साल सरोज के साथ हुई थी। कुछ समय के बाद दोनों में दहेज को लेकर दोनों में विवाद रहने लगा था। तीन साल पहले सरोज के मायके वालों ने मुनीश के खिलाफ दहेज उत्पीड़न का मुकदमा दर्ज कराया। परिवार परामर्श केंद्र पर भी उनका समझौता नहीं हो पाया था। पिछले एक साल से सरोज ने ससुराल आना बंद कर दिया था। पति मुनीश की मौत की खबर के बाद शुक्रवार को ही सरोज स्वयं ससुराल पहुंच गई थी।
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