संभल। गांव कसेरूआ में गंगा एक्सप्रेसवे की जमीन को लेकर तीन साल से चल रहा विवाद खत्म नहीं हो रहा है। एक्सप्रेसवे अथॉरिटी की शिकायत पर तहसील प्रशासन ने कार्रवाई शुरू की। बुधवार को भारी पुलिस बल और पीएसी के साथ जमीन की पैमाइश और हदबंदी की गई। इस दौरान किसानों ने मौके पर पहुंचकर विरोध जताया, नोकझोंक हुई लेकिन राजस्व टीम ने नियमानुसार कार्रवाई किए जाने की बात कही। मौके पर मौजूद पुलिस ने भीड़ को जमा नहीं होने दिया।
नायब तहसीलदार अरविंद कुमार के नेतृत्व में छह लेखपालों के दल ने नापजोख की। राजस्व अभिलेखों के आधार पर जमीन की सीमाएं तय की गईं। मौके पर एक्सप्रेसवे अधिकारियों ने भी अपनी सीमा की निशानदेही कराई। प्रशासन ने जमीन से कब्जा हटाने के लिए बुलडोजर भी बुलाया। इससे किसानों का विरोध बढ़ गया। कार्रवाई के दौरान किसानों और प्रशासनिक टीम के बीच तीखी कहासुनी भी हुई। किसानों ने प्रशासन की इस कार्रवाई को गलत बताया है।
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किसानों का आरोप- तय सीमा से अधिक ली जमीन, मुआवजा नहीं दिया
किसानों का आरोप है कि गंगा एक्सप्रेसवे के निर्माण के दौरान उनकी जमीन तय सीमा से अधिक ले ली गई है। कई किसानों ने यह भी बताया कि उन्हें उनकी जमीन का कम मुआवजा मिला है। कुछ किसानों का कहना था कि उनकी जमीन एक्सप्रेसवे परियोजना में शामिल कर ली गई। इसके बावजूद उन्हें एक रुपया भी मुआवजा नहीं दिया गया है। इसी मुद्दे को लेकर पिछले तीन साल से लगातार खींचतान और विवाद चल रहा है।
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प्रशासन का दावा- अभिलेख के मुताबिक हदबंदी की
नायब तहसीलदार अरविंद कुमार ने किसानों के सभी आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया है। उन्होंने कहा कि किसी भी किसान की जमीन तय सीमा से ज्यादा नहीं ली गई है। सभी प्रभावित किसानों को नियमानुसार मुआवजा दिया जा चुका है। प्रशासन राजस्व अभिलेखों और शासन के दिशा-निर्देशों के अनुसार ही काम कर रहा है। जमीन की सीमा तय की गई है, ताकि विवाद समाप्त हो सके।
गंगा एक्सप्रेसवे अथॉरिटी की ओर से आग्रह किया गया था कि उनकी जमीन की हदबंदी की जाए। इसी क्रम में यह हदबंदी की गई है। मुआवजा सभी को दिया जा चुका है। अब विरोध गलत किया जा रहा है।
अरविंद कुमार, नायब तहसीलदार