सिरसी। चार मोहर्रम को सिरसी के इमाम बारगाह एवं अजाखानों में मजलिस और मातम का सिलसिला जारी रहा। कर्बला की दास्तान सुनकर लोगों की आंखें भर आईं। वहीं मजलिसों के बाद जुलूस बरामद किए। अजादारों ने मातम किया।
मोहल्ला शर्की में अली कौसर के अजाखाने पर आयोजित हुई मजलिस में मर्सिया मोहम्मद असगर और उनके साथियों ने पढ़ा। मजलिस में मौलाना मोहम्मद अब्बास ने हजरत अब्बास अलमदार के फजाइल और शहीदाने करबला हजरत इमाम हुसैन के मसाइब बयान किए। मजलिस के बाद अंजुमन मीसम ए अजा की ओर से अलम मुबारक हजरत अब्बास अलमदार बरामद हुआ, जिसमें अंजुमन जुल्फकारे हैदरी, अंजुमन गुलदस्ते हैदरी, अंजुमन हाशमी, अंजुमन हैदरी, अंजुमन मीसम ए अजा, अंजुमन पंजेतनी, अंजुमन दिलदारे हुसैनी, अंजुमन कारवाने हुसैनी, अंजुमन सफीना ए अजा अंजुमन हुसैनी, अंजुमन रौनकें अजा, अंजुमन गुंचा ए इस्लाम, दास्ताने कर्बला और अंजुमन फैजे पन्जेतनी ने नोहा ख्वानी और सीनाजनी की। जुलूस अपने निर्धारित मार्ग से होता हुआ इमाम बारगाह मोहल्ला शर्की सादात में सम्पन्न हुआ।
दूसरी ओर, इमाम बारगाह और अजाखानों में हुईं मजलिसों में मर्सिया वकार मेंहदी, गुलशन दालानी, खावर रजा, नसीमुल हसन, खुर्शीद अनवर, अली कबीर उर्फ अजमल, गदीरूल हसन, चौधरी बबर, महताब हुसैन, मोहम्मद असगर जैदी, फरहत अब्बास आदि ने मर्सिया पढ़ते हुए कर्बला के शहीदों की शहादत बयान की, जिसे सुनकर अजादारों की आंखों में आंसू आ गए।