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सपा मुखिया अखिलेश यादव ने लिया डबल मर्डर मामले का लिया संज्ञान

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संभल/बहजोई। समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने घटना का संज्ञान लिया और प्रदेश के पुलिस महानिदेशक से फोन पर बातचीत की। संभल के पुलिस अधीक्षक से भी उन्होंने घटना की जानकारी ली। राज्यसभा सदस्य जावेद अली खां से हुई बातचीत में सपा मुखिया ने इसका उल्लेख किया है। राज्यसभा सदस्य जावेद अली खां ने बताया कि सपा मुखिया ने इस मामले में प्रभावी कार्रवाई और पीड़ित परिवार की मदद के लिए पार्टी पदाधिकारियों को निर्देश दिए हैं। इसके बाद वह दिल्ली से फत्तेपुर शमशोई के लिए चले। इस बीच सपा के जिलाध्यक्ष फिरोज खां, क्षेत्रीय नेता सतीश प्रेमी घटना की जानकारी मिलते ही बहजोई के बाहपुरपट्टी पहुंचे और पीड़ित परिवार का हालचाल लिया।
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मौत के साथ हुआ छोटेलाल के तेरह वर्ष के सियासी सफर का अंत
वर्ष 2007 में छोटेलाल दिवाकर का सियासी सफर शुरू हुआ था। वर्ष 2012 में सपा के राज्यसभा सदस्य जावेद अली खां की पैरवी पर उन्हें 2012 के विधानसभा चुनाव में सपा ने प्रत्याशी बनाया था लेकिन प्रत्याशी तय होने के कुछ ही दिन बाद सीट कांग्रेस के खाते में चली गई और इसके चलते उन्हें नामांकन करने का मौका नहीं मिला था। लेकिन वे लगातार समाजवादी पार्टी के लिए सक्रिय रहे। सपा मुखिया से उनका कम मिलना हुआ है लेकिन सपा के महासचिव रामगोपाल यादव से उनकी मुलाकात थी।
कुछ लोगों को राजनीति में उसका उभरना रास नहीं आया
मुझे उसकी हत्या का दुख है। वह मेरा करीबी था और चंदौसी क्षेत्र का उभरता हुआ नेता था लेकिन उसका राजनीति में उभरना कुछ लोगों को पसंद नहीं था। वे लोग आए दिन उसके खिलाफ फर्जी शिकायतें करते थे। इसका जिक्र उसने कई बार बातचीत में किया था। अंतत: उसकी और उसके बेटे की जान ले ली गई, जो बेहद दुखद है।
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जावेद अली खां, राज्य सभा सदस्य।
खूनी रंजिश का अतीत : फत्तेपुर शमसोई में एक दिन में हुई थी 11 लोगों की हत्या
फत्तेपुर शमशोई गांव से खूनी रंजिश का पुराना अतीत जुड़ा है। गांव में 1973 में तीन परिवारों के 11 सदस्यों की हत्या की गई थी। गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि उस वक्त घटना का प्रसारण बीबीसी लंदन से हुआ था। इसके बाद पुलिस ने गांव में तमाम लोगों को रंजिश से जुड़े मामलों में उठाया और जेल भेजा। गांव में डर और दहशत का माहौल बन गया था। इसके चलते तमाम लोग गांव छोड़कर चंदौसी तथा आसपास के दूसरे शहरों के लिए पलायन कर गए थे। गांव के लोग खूनी रंजिश में हुई हत्याओं की वारदातों को याद करके सिहर उठते हैं।
ग्रामीणों ने बताया कि जातिगत वर्चस्व की जंग में क्षत्रिय बिरादरी के 11 लोगों की हत्या की गई थी। इसमें सुंदर सिंह, सोबरन सिंह, चरन सिंह के परिवार में यह 11 लोग मारे गए थे। इन तीन परिवारों में एक लड़की और सोबरन सिंह के भाई बाबू सिंह ही बचे थे। हत्या की वारदात के वक्त बालिका पड़ोस में किसी के घर दुबक गई थी। इसलिए बच गई थी। इसके अलावा बाबू सिंह घर पर नहीं थे।
इसके बाद वर्ष 2012 में वर्चस्व की जंग में बंटी सिंह की जान ली गई। इसके बाद जंग आगे बढ़ी और मई 2013 में कुंदरकी के पास नरेश शर्मा की हत्या कर दी गई थी। मई 2013 में एक महिला को गोली लगी थी लेकिन वह बच गई थी। रंजिश में हुई कत्ल की इन घटनाओं का छोटेलाल दिवाकर से कोई सीधा लेना-देना नहीं रहा है लेकिन हत्या के इन सभी मामलों में अगर कोई समानता है तो सिर्फ यही कि वर्चस्व की जंग में 13 लोगों की जान गई है। अब अगर प्रधान के पति छोटेलाल दिवाकर और उनके बेटे की हत्या को जोड़ दिया जाए तो 15 हत्याएं वर्चस्व की जंग में जा चुकी हैं। छोटेलाल दिवाकर की पत्नी जब ग्राम प्रधान बनीं तो कुछ लोग उन्हें भी जोड़कर चलने लगे थे। जैसे-जैसे छोटेलाल दिवाकर का वर्चस्व बढ़ा तो असरदार लोगों को यह नागवार गुजरने लगा। वे इसे सबक सिखाना चाहते थे। इससे पहले भी छोटेलाल दिवाकर और वर्चस्व को चुनौती देने वालों के बीच विवाद हो चुका है।
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