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अखिलेश की सूची में फहीम की एंट्री, जियाउर्रहमान आउट

Fri, 30 Dec 2016 01:31 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, संभल
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मुख्यमंत्री अखिलेश यादव - फोटो : amar ujala
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अखिलेश की सूची में नौ प्रत्याशियों के नाम ऐसे हैं जो मुलायम सिंह की सूची में भी हैं।  बिलारी सीट पर मुलायम ने अपने खास पूर्व सांसद डॉ. शफीकुर्रहमान बर्क के पौत्र जियाउर्रहमान को टिकट दिया, जबकि अखिलेश ने इस सीट पर मो. फहीम को प्रत्याशी बनाया है। 
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पांच नाम ऐसे हैं जो मुलायम की सूची में नहीं हैं। अमरोहा की धनौरा सीट पर सपा के मौजूदा विधायक एम चंद्रा का टिकट काटकर उर्वशी को प्रत्याशी बनाया था लेकिन अब अखिलेश यादव ने इस सीट पर जगराम सिंह को प्रत्याशी बनाया है। हसनपुर सीट से कैबिनेट मंत्री कमाल अख्तर को अखिलेश ने अपनी लिस्ट में शामिल किया है, जबकि मुलायम की लिस्ट में कमाल नहीं थे। मुलायम ने अमरोहा शहर सीट से कैबिनेट मंत्री महबूब अली को शामिल किया जबकि अखिलेश ने महबूब को अपनी लिस्ट में जगह नहीं दी है। गुन्नौर विधायक और पार्टी नेताओं ने सीएम से कहा - गुन्नौर से लड़ें चुनाव सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव के गढ़ गुन्नौर में अबकी बार पार्टी के बागी चुनौती बन गए हैं। सपा छोड़कर भाजपा में शामिल हुए सपा के दिग्गज अब वोटबैंक पर खतरा हैें। लिहाजा सपा के सिपहसलार रामखिलाड़ी यादव ने अपनी सीट छोड़ने का एलान करते हुए सीएम अखिलेश यादव से गुन्नौर से चुनाव लड़ने का आग्रह किया है।
 
उत्तर प्रदेश सरकार के पूर्व राज्यमंत्री अजीत कुमार उर्फ राजू यादव के बाद पूर्व विधायक राजेश यादव और विधायक प्रेमवती यादव के बेटे भूपेंद्र सिंह उर्फ काली यादव ने भी भाजपा का दामन थाम लिया है। गुन्नौर सियासत का वही क्षेत्र है जहां से मुलायम सिंह यादव 2004 में विधायक रह चुके हैं।
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वे रिकार्ड मतों से चुनाव जीते थे। तब से ही इस सीट पर सपा नेतृत्व का खास ध्यान रहता है। मुलायम सिंह यादव कई बार कह चुके हैं कि गुन्नौर में जो प्यार और सम्मान मिला वह यादगार है। गुन्नौर विधानसभा क्षेत्र अब बदायूं लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है। बदायूं से मुलायम सिंह यादव परिवार के सदस्य धर्मेेद्र यादव मौजूदा सांसद हैं। मुलायम सिंह यादव के सिपहसलार रहे अजीत कुमार राजू ने धर्मेंद्र  यादव को जिताने में 2014 के चुनाव में योगदान दिया था। राजू तब कांग्रेस से वापस सपा में आए थे और अब भाजपा में चले गए हैं। वर्ष 2002 में वह गुन्नौर के विधायक थे और जद यू से चुने गए लेकिन 2004 में उन्होंने इस्तीफा देकर जद यू छोड दी थी और सपा ज्वाइन की थी। 

 मुलायम सिंह यादव के लिए उन्होंने गुन्नौर विधानसभा सीट से भी इस्तीफा दिया था। तब गुन्नौर से मुलायम सिंह यादव विधायक बने थे। अब राजू एक बार फिर भाजपा से टिकट के दावेदार हैं और अपने साथ तमाम सपाइयों को ले जाने की लामबंदी कर रहे हैं।

राजू के भाजपा में आने के बाद सपा को एक और झटका लगा है। यहां सपा से 1993 से 1995 तक विधायक रहे राजेश यादव भी भगवा खेमे में खड़े हो गए हैं। वह सहसवान से टिकट के दावेदार हैं लेकिन उनका गांव पतरिया गुन्नौर में है और वह भी गुन्नौर के चुनाव में सपा के लिए नुकसान देने की तैयारी कर रहे हैं। दिग्गजों की ओर से मुलायम के गढ़ में यह एक चुनौती कम नहीं है। शुक्रवार को लखनऊ में हुई विधायकों की बैठक में गुन्नौर विधायक विधायक राम खिलाड़ी यादव ने सीएम को गुन्नौर से टिकट लड़ने का दावतनामा दिया। उन्होंने कहा है कि गुन्नौर की जनता चाहती है कि मुलायम सिंह यादव परिवार को व्यक्ति गुन्नौर से चुनाव लड़े। वह चुनाव लड़ने से किनारा कर रहे हैं। बेशक वह सीएम को दावतनामा देकर गुन्नौर की सीट बचाने की बात कह रहे हैं।  ऋषिपाल दद्दा ने भी सीएम से किया आग्रह बबराला। गुन्नौर में सपा के कद्दावर नेता ऋषिपाल सिंह दद्दा ने भी सीएम को पत्र भेजकर उन्हे गुन्नौर से चुनाव लड़ने का न्यौता दिया है। उन्होंने हवाला दिया है कि यदि गुन्नौर में सीएम चुनाव लड़ते हैं तो यहां टिकट को लेकर होने वाले बिखराब से पार्टी बच जाएगी।

वह गुन्नौर विधानसभा की राजनीति में हो रहे बदलाव को जानकारी सपा हाईकमान को पहले ही दे चुके है। लगातार कई खेमे में बंटी सपा को साधने के लिए सैफई परिवार को आना जरूरी है। चूंकि स्थानीय राजनीतिक गतिविधियों से परेशान कई नेता सपा छोड़ भाजपा में शामिल हो चुके हैं जोकि पार्टी के लिए विभीषण का काम करेंगे। वहीं छात्रसभा के जिलाध्यक्ष अमित यादव ने भी मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के चुनाव लड़ने के लिए सांसद धर्मेन्द्र यादव से मांग की है। लक्ष्मी का टिकट कटा, श्रीपाल बने प्रत्याशी मुरादाबाद। चंदौसी से सपा की सिटिंग विधायक लक्ष्मी गौतम का टिकट इस बार कट गया है। प्रदेश सपा अध्यक्ष शिवपाल यादव की ओर से जारी 68 प्रत्याशियों की सूची में चंदौसी सुरक्षित सीट से श्रीपाल दिवाकर को सपा उम्मीदवार बनाया गया है। समझा जाता है कि पार्टी ने लक्ष्मी गौतम को आए दिन विवादों में रहने की सजा के तौर पर टिकट काटकर सजा दी है। उधर, यादव परिवार के नजदीकी माने जाने वाले राम खिलाड़ी यादव को गुन्नौर से दोबारा टिकट दिया गया है। राम खिलाड़ी यादव का नाम शिवपाल की सूची में होना थोड़ा अचरज की बात है क्योंकि उन्होंने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के लिए अपनी सीट खाली करने का प्रस्ताव रखा था।  पिंकी यादव के खिलाफ लडेंगे सपा के रामसरन संभल (ब्यूरो)। असमोली विधानसभा क्षेत्र में पिंकी यादव का टिकट घोषित होने से टिकट के दावेदारों को झटका लगा है। ऐसे में दावेदारों ने अपनी ही पार्टी के प्रत्याशी के खिलाफ चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी है। आने वाली सियासत इसका असर रहेगा क्योंकि टिकट के दावेदारों को उम्मीद थी कि अबकी बार सपा नेतृत्व परिवर्तन करेगा लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

मुलायम सिंह यादव परिवार के साथ करीबी संबंध रखने वाले रामसरन यादव असमोली क्षेत्र से टिकट के दावेदार हैं। उन्होंने मुलायम सिंह यादव के नाम पर अतरासी में विद्यालय बनाया है। जिसमें खुद मुलायम सिंह यादव आए थे। प्रोफेसर रामगोपाल यादव और मुलायम सिह यादव से उनके पारिवारिक संबंध हैं। इन संबंधों और क्षेत्र में अपनी मेहनत की बदौलत उन्हें टिकट की उम्मीद थी लेकिन जब असमोली से पिंकी यादव का नाम आया तो उनकी उम्मीदों को  झटका लगा। रामसरन यादव से जब अमर उजाला ने बताचीत की तो उन्होंने कहा मेरी अर्जी पर सपा नेतृत्व को फैसला लेना था।

मैं सीट  निकाल कर सपा के खाते में डालने की स्थिति में था। मैं 1993 से लगातार समाजवादी पार्टी में हूं। तमाम रिपोर्ट्स मेरे पक्ष में हैं। इसके बाद भी मेरे आवेदन पर विचार न होना मेरे लिए आहत करने वाला फैसला है। मैं तो यही कहूंगा कि अर्जी मेरी थी, मर्जी उनकी थी लेकिन अब सियासी घटनाक्रम बदल गया है। चुनाव  मैदान में उतरने के बारे में मेरी मर्जी चलेगी। उन्होंने साफ कर दिया है कि वह चुनाव लडेंगे।
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