सिरसी में ताबूत के जुलूस में शामिल अजादार। संवाद
सिरसी। अय्यामे फात्मा जहरा के मौके पर इमाम बारगाहों और अजाखानों में मजलिसों का सिलसिला जारी रहा। रसूले खुदा की बेटी शहजादी फात्मा जहरा की शहादत पर कस्बे में शबीहे ताबूत निकाल कर रंज-ओ-गम का इजहार किया गया। इमाम बारगाह मोहल्ला शर्की सादात में पांच रोजा मजलिसों का आयोजन किया गया। इमाम बारगाह इमाम रजा, इमाम बारगाह मकूफा अजाखाना दालान, इमाम बारगाह मुंशियान आदि में भी मजलिसें आयोजित की गईं।
मंगलवार को मोहल्ला शर्की में जामिया इमाम मेहंदी में हुई मजलिस में मर्सिया वकार मेहंदी और उनके साथियों ने पढ़ा। जबकि मजलिस को अमेरिका से आए मौलाना माहिर हुसैन ने खिताब करते हुए कहा अरब में उस दौर में बेटी के पैदा होते ही उसे जिंदा दफन कर दिया जाता था। नबी-ए-करीम ने इस प्रथा को समाप्त किया। अंत में हजरत फात्मा जहरा के मसाइब बयान करते हुए कहा मदीने में नबी ए करीम की बेटी और हजरत अली की बीबी हजरत फात्मा जहरा पर जालिमों ने बहुत जुल्म किए थे। जिसे सुनकर अजादारों की आंखों में आंसू आ गए।
मजलिस के बाद शबीहे ताबूत का जुलूस बरामद हुआ। जिसमें अंजुमन हाशमी ने नोहा पढ़ा। दूसरी ओर, मोहल्ला शर्की मिठौली रोड पर हसन अब्बास के अजाखाने में हुई मजलिस में मर्सिया ख्वानी अली कबीर उर्फ अजमल व उनके साथियों ने की। जबकि मजलिस को मौलाना जमाल अब्बास ने संबोधित किया। मजलिस के बाद शबीहे ताबूत का जुलूस निकाला गया। इसमें अंजुमन जुल्फकारे हैदरी, अंजुमन हैदरी, कारवाने हुसैनी और मीसमे अजा ने नोहा ख्वानी की। ताबूत इमाम बारगाह मोहल्ला शर्की सादात में पहुंचकर संपन्न हुआ।